sábado, 4 de janeiro de 2025

द्वितीय राजा 05 गेहजी कुष्ठ रोग से पीड़ित है

 द्वितीय राजा 05

गेहजी कुष्ठ रोग से पीड़ित है


20 तब एलीशा के जवान गेहजी ने, जो परमेश्वर का भक्त या, कहा, देख, मेरे प्रभु ने उस अरामी नामान को जो कुछ वह अपने हाथ से लाया है, कुछ भी देने से रोक रखा है; परन्तु यहोवा के जीवन की शपथ मैं उसके पीछे दौड़ूंगा, और उस से कुछ ले लूंगा।

21 और गेहजी नामान के निकट तक गया; और नामान, यह देखकर कि वह मेरे पीछे दौड़ रहा है, उसकी भेंट के लिये रथ से कूद पड़ा, और उस से कहा, क्या सब ठीक है?

22 और उस ने कहा, सब कुशल है; मेरे प्रभु ने मुझे यह कहने की आज्ञा दी, कि देख, अभी एप्रैम पर्वत से भविष्यद्वक्ताओं के चेलों में से दो जवान मेरे पास आए हैं; फिर उन्हें एक किक्कार चाँदी और दो जोड़ी पोशाकें दो।

23 और नामान ने कहा, दो तोड़े लेना तेरे काम आएगा। और उस ने उस से बिनती करके दो किक्कार चान्दी दो बोरोंमें, और दो जोड़े वस्त्र बान्धकर; और उन्हें अपने दो जवानों पर रखा जो उसे अपने आगे आगे ले जा रहे थे।

24 और जब वह शिखर पर पहुंचा, तब उस ने उनको उनके हाथ से छीनकर घर में रखा; और उन पुरूषोंको विदा किया, और वे चले गए।

25 तब वह भीतर जाकर अपने स्वामी के साम्हने खड़ा हुआ। और एलीशा ने उस से पूछा, हे गेहजी, तू कहां से आता है? और उस ने कहा, तेरा दास न तो इधर गया, न उस ओर।

26 उस ने उस से कहा, जब वह पुरूष अपके रथ पर से तुझ से भेंट करने को लौट आया, तब क्या मेरा मन तेरी ओर न या। क्या तुम्हारे लिये चान्दी, और वस्त्र, और जलपाई के बाग, और दाख की बारियां, और भेड़-बकरी, और बैल, और दास-दासियां ​​लेने का अवसर था?

27 इस कारण नामान का कोढ़ तुझ को और तेरे वंश को सदा तक लगा रहेगा। तभी बर्फ के समान सफ़ेद एक कोढ़ी उसके सामने से निकला।

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