segunda-feira, 20 de janeiro de 2025

द्वितीय राजा 18 सन्हेरीब ने यहूदा पर आक्रमण किया

 द्वितीय राजा 18

सन्हेरीब ने यहूदा पर आक्रमण किया


13 परन्तु हिजकिय्याह राजा के चौदहवें वर्ष में अश्शूर के राजा सन्हेरीब ने यहूदा के सब दृढ़ नगरोंपर चढ़ाई करके उनको ले लिया।

14 तब यहूदा के राजा हिजकिय्याह ने अश्शूर के राजा के पास लाकीश को कहला भेजा, कि मैं ने पाप किया है; मुझ से दूर हो जाओ; जो कुछ भी तुम मुझ पर थोपोगे मैं ले लूँगा। तब अश्शूर के राजा ने यहूदा के राजा हिजकिय्याह पर तीन सौ किक्कार चान्दी और तीस किक्कार सोना लगाया।

15 इसलिये जितनी चान्दी यहोवा के भवन में और राजभवन के भण्डारों में मिली वह सब हिजकिय्याह ने दे दी।

16 उस समय हिजकिय्याह ने यहोवा के मन्दिर के किवाड़ों में से, और उन चौखटों में से, जिनसे यहूदा के राजा हिजकिय्याह ने सोना ढांपा या, सोना काटकर अश्शूर के राजा को दे दिया।

17 परन्तु अश्शूर के राजा ने तर्तन, और रबशरीस, और लाकीश के रबशाके के पास हिजकिय्याह राजा के पास बड़ी सेना भेज दी; वे ऊपरी स्विमिंग पूल के जलसेतु के नीचे खड़े थे, जो कपड़े धोने के मैदान के रास्ते के बगल में है।

18 और उन्होंने राजा को बुलाया, और हिल्किय्याह का पुत्र एल्याकीम जो भण्डारी था, और शेब्ना जो मन्त्री था, और आसाप का पुत्र योआ जो राजधिपति था, वे उनके पास निकल गए।

19 और रबशाके ने उन से कहा, अब हिजकिय्याह से कहो, महान राजा अर्थात अश्शूर का राजा यों कहता है, कि तू किस भरोसे पर भरोसा रखता है?

20 तुम कहते हो (परन्तु तुम्हारे मुंह में यही वचन है, कि युद्ध के लिथे युक्ति और सामर्थ है। फिर अब तुम किस पर भरोसा रखते हो, कि मुझ से बलवा करते हो?

21 देख, अब तू मिस्र में उस टूटे हुए नरकट पर भरोसा रखता है, जिस पर यदि कोई टेक लगाए, तो वह उसके हाथ में घुसकर उसे छेद देगा; मिस्र का राजा फ़िरौन अपने सब भरोसा रखनेवालोंके प्रति वैसा ही है।

22 परन्तु यदि तू मुझ से कहे, कि हम अपके परमेश्वर यहोवा पर भरोसा रखते हैं, तो क्या यह वही नहीं है जिसके ऊंचे स्थानोंऔर वेदियोंको हिजकिय्याह ने यह कहकर ले लिया, कि तुम यरूशलेम की इस वेदी को दण्डवत् करना चाहोगे?

23 इसलिये अब अपके प्रभु अश्शूर के राजा को बन्धक दे, और यदि तू उनके लिये सवार दे सके, तो मैं तुझे दो हजार घोड़े दूंगा।

24 तो फिर तू मेरे प्रभु के छोटे से छोटे सेवकोंमें से एक हाकिम का मुंह क्योंकर फेर सकता है? परन्तु रथोंऔर सवारोंके कारण तुम मिस्र पर भरोसा रखते हो।

25 तो क्या मैं यहोवा के बिना इस स्यान को नाश करने को चढ़ गया हूं? यहोवा ने मुझसे कहा: इस देश पर चढ़ाई करो और इसे नष्ट कर दो।

26 तब हिल्किय्याह के पुत्र एल्याकीम और शेब्ना और योआह ने रबशाके से कहा, हम तुझ से बिनती करते हैं, कि तू अरामी में अपने दासोंसे कह; क्योंकि हम तुम्हें अच्छी तरह समझते हैं, और जो शहरपनाह पर खड़े हैं, उनके कान में हम से यहूदी भाषा में बातें न करते।

27 परन्तु रबशाके ने उन से कहा, क्या मेरे प्रभु ने मुझे तेरे प्रभु और तुम्हारे ही पास ये बातें कहने के लिथे भेजा है, और शहरपनाह पर बैठे हुए मनुष्योंके पास नहीं, कि वे तुम्हारे संग अपना गोबर खाएं और अपना गोबर पीएं? मूत्र?

28 तब रबशाके खड़ा हुआ, और यहूदी भाषा में ऊंचे शब्द से चिल्लाकर कहा, महाबली राजा, अर्थात अश्शूर के राजा का वचन सुनो।

29 राजा यों कहता है, हिजकिय्याह तुम को धोखा न दे; क्योंकि वह तुम्हें अपने हाथ से बचा न सकेगा;

30 और हिजकिय्याह यह कहकर तुम्हें यहोवा पर भरोसा नहीं रखता, कि यहोवा निश्चय हम को बचाएगा, और यह नगर अश्शूर के राजा के वश में न किया जाएगा।

31 हिजकिय्याह की न सुन; क्योंकि अश्शूर का राजा यों कहता है, कि मुझ से भेंट बान्ध लो, और मेरे पास आकर अपनी अपनी दाखलता और अंजीर के वृक्ष का फल खाओ, और अपने अपने कुण्ड में से जल पीओ।

32 जब तक मैं आकर तुम्हें तेरे समान देश में न ले जाऊं, जो गेहूं और नए दाखमधु का देश, और रोटी और दाख की बारियों का देश, और जलपाई के वृक्षों, तेल और मधु का देश है; इस प्रकार तुम जीवित रहोगे और मरोगे नहीं; और हिजकिय्याह की न सुनोगे; क्योंकि वह तुम्हें यह कह कर भड़काता है, कि यहोवा हम को बचाएगा।

33 क्या अन्यजातियों के देवता अपके देश को अश्शूर के राजा के हाथ से बचा सकते थे?

34 हमात और अर्पाद के देवताओं का क्या हुआ? सेपरवैम, हेना और इवा के देवताओं का क्या हुआ? क्या उन्होंने सामरिया को मेरे हाथ से बचा लिया है?

35 और देश देश के सब देवताओंमें से जिन्होंने अपके देश को मेरे हाथ से बचाया, वे क्या हैं, जिस से यहोवा यरूशलेम को मेरे हाथ से बचाए?

36 परन्तु लोग चुप रहे, और उसे एक भी बात का उत्तर न दिया; क्योंकि राजा की ओर से यह आज्ञा मिली थी, कि तुम उसे उत्तर न देना।

37 तब हिल्किय्याह का पुत्र एल्याकीम जो भण्डारी था, और शेब्ना जो मन्त्री था, और आसाप का पुत्र योआ जो राजधिपति था, वे वस्त्र फाड़े हुए हिजकिय्याह के पास आए, और रबशाके की बातें उस से कह सुनाईं।

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