द्वितीय राजा 25
गदल्याह शासन करता है, लेकिन इश्माएल उसे मार डालता है
23 जब सेनाओं के प्रधानों ने सुना, कि बाबुल के राजा ने गदल्याह को प्रधान किया है, तब वे अपके जनोंसमेत मिस्पा को गदल्याह के पास आए, अर्थात् नतन्याह का पुत्र इश्माएल, और कारेह का पुत्र योहानान, और सरायाह। नतोपावासी तनहूमेत का पुत्र, और माकावासी का पुत्र याजन्याह, ये अपने जनों समेत।
24 और गदल्याह ने उन से और उनके जनों से शपथ खाकर कहा, कसदियोंके दास होने से मत डरो; देश में रहो, और बाबुल के राजा की सेवा करो, और यह तुम्हारे लिए अच्छा होगा।
25 और सातवें महीने में ऐसा हुआ कि इश्माएल जो नतन्याह का पुत्र और एलीशामा का पोता और राजवंश का या, और उसके साय दस जन आए, और गदल्याह को मारा, और वह मर गया, और यहूदी और कसदी भी मर गए। जो मिस्पा में उसके साथ थे।
26 तब छोटे से लेकर बड़े तक सब लोग, और सेनाओं के प्रधान भी उठकर मिस्र में आ गए, क्योंकि वे कसदियों से डरते थे।
27 इसके बाद यहूदा के राजा यहोयाकीन के बन्धुवाई के सैंतीसवें वर्ष के बारहवें महीने के सत्ताईसवें वर्ष को बाबुल के राजा दुष्ट मरोदक ने यहोयाकीन का सिर उठा लिया। जिस वर्ष वह यहूदा के राजा होकर बन्दीगृह से राज्य करता रहा।
28 और उस ने उस से प्रेम की बातें की, और उसके सिंहासन को बाबुल में उसके संग के राजाओंके सिंहासन से अधिक ऊंचा किया,
29 और उस ने बन्दीगृह के वस्त्र बदले, और जीवन भर उसके साम्हने रोटी खाया।
30 और उसकी जीविका के लिये राजा की ओर से उसे उसके जीवन भर के लिये प्रति दिन का भोजन दिया जाता था।
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