quarta-feira, 29 de janeiro de 2025

द्वितीय राजा 23 योआहाज राज्य करता है, और उसे बन्धुवाई करके मिस्र ले जाया जाता है

 द्वितीय राजा 23

योआहाज राज्य करता है, और उसे बन्धुवाई करके मिस्र ले जाया जाता है


31 जब यहोआहाज राज्य करने लगा, तब वह तेईस वर्ष का या, और यरूशलेम में तीन महीने तक राज्य करता रहा; और उसकी माता का नाम हम्मूतल या, जो लिब्नावासी यिर्मयाह की बेटी थी।

32 और उस ने अपने पुरखाओं के समान वह काम किया, जो यहोवा की दृष्टि में बुरा है।

33 परन्तु फिरौन नको ने उसे हमात देश के रिबला में बन्दीगृह में डलवा दिया, कि वह यरूशलेम में राज्य न कर सके; और उस ने देश पर एक सौ किक्कार चान्दी और एक किक्कार सोने का दण्ड लगाया।

34 फिरौन नको ने योशिय्याह के पुत्र एल्याकीम को उसके पिता योशिय्याह के स्यान पर राजा बनाया, और उसका नाम बदल कर यहोयाकीन रखा; परन्तु वह योआहाज को अपने संग ले गया, और मिस्र में आया, और वहीं मर गया।

35 और यहोयाकीन ने वह चान्दी और सोना फिरौन को दे दिया; परन्तु उस ने उस देश को फिरौन की आज्ञा के अनुसार यह रूपया देने के लिथे धोखा दिया; और उस ने उस देश के लोगोंसे उनके मोल के अनुसार चान्दी और सोना मांग लिया, कि उसे फिरौन नको को दे दें।

36 जब यहोयाकीन राज्य करने लगा तब वह पच्चीस वर्ष का या, और ग्यारह वर्ष तक यरूशलेम में राज्य करता रहा; और यह उसकी माता का नाम जबूदा था, जो रूमावासी पदायाह की बेटी थी।

37 और उस ने अपने पुरखाओं की नाईं यहोवा की दॄष्टि में बुरा किया।

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