द्वितीय राजा 22
हुल्दा भविष्यवक्ता
14 तब हिल्किय्याह याजक, और अहीकाम, अकबोर, शापान, और असायाह, हुल्दा भविष्यद्वक्ता के पास गए, जो शल्लूम की स्त्री थी, जो तिकवा का पोता, और हराश का पोता और वस्त्रों का रखवाला था (और वह यरूशलेम में रहने लगी) , दूसरे भाग में) , और उन्होंने उससे बात की।
15 और उस ने उन से कहा, इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यों कहता है, जिस पुरूष ने तुम को मेरे पास भेजा है, उस से यह कहो:
16 यहोवा यों कहता है, देख, मैं इस स्यान और इसके निवासियोंपर विपत्ति डालूंगा; अर्थात् जो पुस्तक यहूदा के राजा ने पढ़ी थी उसके सब वचन हैं।
17 क्योंकि उन्होंने मुझे त्यागकर पराये देवताओं के लिये धूप जलाया, और अपने सब कामोंके कारण मुझे रिस दिलाई है, इस कारण मेरा क्रोध इस स्यान पर भड़का है, और वह शान्त न होगा।
18 परन्तु यहूदा का राजा, जिस ने तुम को यहोवा से पूछने को भेजा है, उस से तुम योंकहना, कि जो बातें तुम ने सुनी हैं उनके विषय में इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यों कहता है:
19 क्योंकि जो कुछ मैं ने इस स्यान और उसके निवासियोंके विषय में कहा या, कि वे उजाड़ और शापित हो जाएंगे, वह सुनकर तेरा मन नरम हो गया, और तू यहोवा के साम्हने दीन हो गया, और तू अपने वस्त्र फाड़कर साम्हने रोने लगा। मैं ने भी तेरी सुन ली है, यहोवा की यही वाणी है।
20 इसलिये देख, मैं तुम को तुम्हारे पुरखाओं के पास इकट्ठा करूंगा, और तुम शान्ति से अपनी कब्र में पहुंचाए जाओगे, और जो विपत्ति मैं इस स्यान पर डालूंगा वह सब अपनी आंखों से न देखोगे। तब वे उत्तर राजा के पास वापस ले आये।
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