domingo, 19 de janeiro de 2025

द्वितीय राजा 17 होशे, इस्राएल का राजा

 द्वितीय राजा 17

होशे, इस्राएल का राजा


1 यहूदा के राजा आहाज के बारहवें वर्ष में एला का पुत्र होशे राज्य करने लगा, और नौ वर्ष तक सामरिया में इस्राएल पर राज्य करता रहा।

2 और उस ने वह काम किया जो यहोवा की दृष्टि में बुरा था, तौभी इस्राएल के उन राजाओं के समान नहीं जो उसके पहिले थे।

3 अश्शूर के राजा शल्मनेसेर ने उस पर चढ़ाई की; और होशे उसका दास बन गया, और उसे भेंट देने लगा।

4 परन्तु अश्शूर के राजा को होशे में कोई षड्यन्त्र मालूम हुआ; क्योंकि उस ने मिस्र के राजा सो के पास दूत भेजे थे, और पहिले के समान प्रति वर्ष अश्शूर के राजा को भेंट न दिया करता था; तब अश्शूर के राजा ने उसे बन्द करके बन्दीगृह में डाल दिया।

5 क्योंकि अश्शूर के राजा ने सारे देश पर चढ़ाई करके शोमरोन तक पहुंच कर उसे तीन वर्ष तक घेरे रखा।

6 होशे के नौवें वर्ष में अश्शूर के राजा ने शोमरोन को ले लिया, और इस्राएल को बन्धुआ करके अश्शूर में ले गया; और उस ने उनको हाला में, और हाबोर में, और गोजान नदी के तीर पर, और मादियोंके नगरोंमें बसाया।

7 और ऐसा हुआ कि इस्राएलियों ने अपने परमेश्वर यहोवा के विरुद्ध पाप किया, जो उन्हें मिस्र के राजा फिरौन के हाथ से निकाल कर मिस्र देश से निकाल लाया; और वे दूसरे देवताओं से डरते थे।

8 और वे उन जातियोंकी विधियोंपर चलते रहे जिन्हें यहोवा ने इस्राएलियोंके साम्हने से निकाल दिया या, और इस्राएल के राजाओं की विधियोंपर जो उन्होंने बनाईं थीं।

9 और इस्राएलियोंने छिपकर ऐसे काम किए जो अपके परमेश्वर यहोवा के विरूद्ध ठीक न थे; और उन्होंने अपने सब नगरों में, गुम्मट से ले कर दृढ़ नगर तक ऊंचे स्थान बनाए।

10 और उन्होंने सब ऊंचे टीलोंपर, और सब हरे वृझोंके तले जंगल की मूरतें और मूरतें खड़ी कीं।

11 और उन्होंने वहां सब ऊंचे स्थानोंपर उन जातियोंकी नाईं जिन्हें यहोवा ने उनके साम्हने से निकाल दिया या, धूप जलाया; और यहोवा को क्रोध दिलाने के लिये बुरे काम करने लगे।

12 और वे उन मूरतोंकी उपासना करने लगे, जिनके विषय यहोवा ने उन से कहा या, कि तुम ऐसा न करना।

13 और यहोवा ने सब भविष्यद्वक्ताओं और सब देखनेवालोंके द्वारा इस्राएल और यहूदा को चित करके कहा, अपक्की बुरी चाल से फिरो, और उस सारी व्यवस्था के अनुसार जो मैं ने तुम्हारे पुरखाओंको दी या, मेरी आज्ञाओं और विधियोंका पालन करो मैं ने अपने सेवक भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा तुम्हारे पास भेजा।

14 परन्तु उन्होंने न सुनी; परन्तु उन्होंने अपनी गर्दनें अपने पुरखाओं की गर्दनों की नाईं कठोर कर लीं, जिन्होंने अपने परमेश्वर यहोवा पर विश्वास नहीं किया था।

15 और उन्होंने उसकी विधियोंऔर उसकी वाचा को, जो उस ने उनके पुरखाओंसे बान्धी या, निकम्मा ठहराया। साथ ही उनकी गवाही, जिसके द्वारा उन्होंने उनका विरोध किया; और वे व्यर्थ वस्तुओं के पीछे चले, और निकम्मे हो गए; और उनके चारों ओर की जातियों के पीछे भी, जिनके विषय में यहोवा ने उन से कहा था, कि जैसा वे करते हैं वैसा न करो।

16 और उन्होंने अपके परमेश्वर यहोवा की सब आज्ञाएं त्याग दीं, और दो बछड़े ढालकर मूरतें बनाईं; और अशेरा की एक मूरत बनाई, और आकाश की सारी सेना के साम्हने गिरकर बाल की उपासना करने लगे।

17 और उन्होंने अपके बेटे-बेटियोंको आग में होम करके होम किया, और आप भावी कहने लगे, और शकुनोंपर विश्वास करते रहे; और उन्होंने वह काम करने के लिये जो यहोवा की दृष्टि में बुरा है, उसे क्रोध दिलाने के लिये अपने आप को बेच डाला।

18 इस कारण यहोवा इस्राएल पर बहुत क्रोधित हुआ, और उनको अपने साम्हने से दूर कर दिया; केवल यहूदा के गोत्र को छोड़कर कुछ भी नहीं बचा।

19 यहां तक ​​कि यहूदा ने अपने परमेश्वर यहोवा की आज्ञाएं न मानीं; परन्तु इस्राएल की जो विधियां उन्होंने बनाईं उन पर चलता रहा।

20 इस कारण यहोवा ने इस्राएल के सब वंश को तुच्छ जाना, और उन पर अन्धेर किया, और उनको लूटनेवालोंके हाथ में कर दिया, यहां तक ​​कि उस ने उनको अपने साम्हने से दूर कर दिया।

21 क्योंकि उस ने इस्राएल को दाऊद के घराने से अलग किया, और नबात के पुत्र यारोबाम को राजा बनाया, और यारोबाम ने इस्राएल को यहोवा के पीछे चलने से हटा दिया, और उन से बड़ा पाप कराया।

22 इस प्रकार इस्राएली यारोबाम के सब पापों के अनुसार चलते रहे, और उन से कभी अलग न हुए।

23 जब तक यहोवा ने अपने सब दास भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा कहा हुआ या, उसके अनुसार इस्राएल को अपने साम्हने से दूर न कर दिया; इस प्रकार इस्राएल को आज के दिन तक उसकी भूमि से अश्शूर तक पहुंचाया गया।

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