द्वितीय राजा 17
अश्शूर का राजा बहुत से विदेशियों को सामरिया ले जाता है
24 और अश्शूर के राजा ने बाबेल, कूत, अवा, हमात और सपवैम से लोगों को लाकर इस्राएलियोंके स्यान शोमरोन के नगरोंमें बसाया; और उन्होंने शोमरोन को ले लिया। और अपने अपने नगरों में रहने लगे।
25 और ऐसा हुआ कि वहां रहने के आरंभ में वे प्रभु का भय नहीं मानते थे; और यहोवा ने उनके बीच सिंह भेजे, और उन्होंने उन में से कितनों को मार डाला।
26 इसलिये उन्होंने अश्शूर के राजा से कहा, जिन लोगों को तू ने बन्धुआ करके शोमरोन में बसाया है, वे उस देश के परमेश्वर की रीति नहीं जानते, इस कारण उस ने उसके बीच सिंह भेजे, और उन्होंने उनको मार डाला; क्योंकि वे पृय्वी के परमेश्वर की उपासना करना नहीं जानते थे।
27 तब अश्शूर के राजा ने कहला भेजा, कि जिन याजकोंको हम ने वहां से निकाला या, उन में से एक को वहां ले आओ; और जाकर वहीं रहो; और वह उनको उस देश के परमेश्वर की रीति सिखाए।
28 तब जिन याजकों को वे शोमरोन से ले गए थे, उन में से एक बेतेल में आकर बस गया, और उनको सिखाया, कि यहोवा का भय कैसे मानना चाहिए।
29 परन्तु सब जातियोंके लोगोंने अपके अपके देवता बनाकर सामरियोंके बनाए ऊंचे स्थानोंपर, अपके अपके अपके नगरोंमें जहां वे रहते थे स्थापित किए।
30 और बाबेल के लोगोंने सुक्कोतबनोत को, और उताह के लोगों ने नेर्गल को, और हमात के लोगों ने अशीमा को बनाया।
31 और एवियों ने निबा और तर्थक को बनाया, और सपर्वियों ने असद्र-मेलेक और अना-मेलेक नाम सपर्वैम के देवताओं के लिये अपने बच्चोंको आग में जला दिया।
32 सो वे यहोवा का भय मानने लगे, और जो छोटे लोग थे वे ऊंचे स्थानोंके याजक ठहराए गए, और ऊंचे स्थानोंके भवनोंकी सेवा टहल करने लगे।
33 सो वे यहोवा का भय मानने लगे, और उन जातियोंकी रीति के अनुसार जिनके बीच वे पहुंचाए गए थे, अपके देवताओं की उपासना भी करने लगे।
34 आज के दिन तक वे पहिली रीति के अनुसार काम करते हैं; वे यहोवा का भय नहीं मानते, और उसकी विधियों, और नियमों, और व्यवस्था, और जो आज्ञा यहोवा ने अपने पुत्रों को दी है उसके अनुसार नहीं करते हैं। याकूब, जिसे उसने इस्राएल नाम दिया।
35 तौभी यहोवा ने उन से वाचा बान्धकर उनको यह आज्ञा दी, कि दूसरे देवताओं से न डरना, और न उनको दण्डवत् करना, न उनकी उपासना करना, और न उनके लिये बलिदान करना।
36 परन्तु यहोवा जो तुम को बड़े बल और बढ़ाई हुई भुजा के द्वारा मिस्र देश से निकाल ले आया, उसी का भय मानना, और उसको दण्डवत् करना, और उसके लिये बलिदान चढ़ाना।
37 और जो जो विधियां, और नियम, और व्यवस्था, और जो आज्ञा उस ने तुम्हारे लिये लिखीं, उनको तुम प्रतिदिन मानने में चौकसी करना; और पराये देवताओं का भय न मानना।
38 और जो वाचा मैं ने तुम्हारे साय बान्धी है उसे तुम न भूलोगे; और तुम दूसरे देवताओं से न डरोगे।
39 परन्तु तू अपके परमेश्वर यहोवा का भय मानना, और वह तुझे तेरे सब शत्रुओंके हाथ से बचाएगा।
40 परन्तु उन्होंने न सुनी; परन्तु उन्होंने अपनी पहिली रीति के अनुसार किया।
41 सो वे जातियां यहोवा का भय मानकर उसकी खुदी हुई मूरतों की पूजा करती थीं, और उनके बेटे-पोते भी अपने पुरखाओं की नाईं आज तक करते हैं।
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