quinta-feira, 16 de janeiro de 2025

द्वितीय राजा 14 अमज़िया अपने पिता के हत्यारों को मार डालता है

 द्वितीय राजा 14

अमज़िया अपने पिता के हत्यारों को मार डालता है


1 इस्राएल के राजा यहोआहाज के पुत्र योआश के राज्य के दूसरे वर्ष में यहूदा के राजा योआश का पुत्र अमस्याह राज्य करने लगा।

2 जब वह राज्य करने लगा, तब वह पच्चीस वर्ष का या, और उनतीस वर्ष तक यरूशलेम में राज्य करता रहा। और यह उसकी माता यरूशलेम की योआदान का नाम था।

3 और उस ने वही किया जो यहोवा की दृष्टि में ठीक है, तौभी अपने पिता दाऊद के समान नहीं, परन्तु अपने पिता योआश के समान ही उस ने किया।

4 परन्तु ऊंचे स्थान न छीने गए; क्योंकि लोग अब भी ऊंचे स्थानों पर बलिदान करते और धूप जलाते थे।

5 जब राज्य उसके हाथ में दृढ़ हो गया, तब उस ने अपने उन कर्मचारियोंको मार डाला, जिन्होंने उसके पिता राजा को मार डाला या।

6 परन्तु उस ने घात करनेवालोंकी सन्तान को घात न किया, जैसा कि मूसा की व्यवस्था की पुस्तक में लिखा है, जिस में यहोवा ने यह आज्ञा दी, कि पिता अपके लड़के के लिये घात न करें, और न सन्तान अपने पिता के लिथे घात करें। ' कारण; परन्तु हर एक अपने पाप के कारण मार डाला जाएगा।

7 उस ने नमक की तराई में दस हजार एदोमियोंको घात किया, और सेला को युद्ध करके ले लिया; और उसका नाम योक्तेल रखा, जो आज के दिन तक है।

8 तब अमस्याह ने इस्राएल के राजा यहोआहाज के पुत्र और येहू के पोता यहोआश के पास दूतों से कहला भेजा, “आओ, हम एक दूसरे से मिलें।”

9 परन्तु इस्राएल के राजा योआश ने यहूदा के राजा अमस्याह के पास कहला भेजा, कि जो लबानोन में है, उस ने लबानोन के देवदार के पास कहला भेजा, कि अपनी बेटी को मेरे बेटे के लिये ब्याह दे; जब वे लबानोन में थे, तो वे थीस्ल को रौंदने लगे।

10 सचमुच तू ने एदोमियोंको मारा है, और तेरा मन फूला है; इस पर घमण्ड करो, और अपने घर में बने रहो; और तू क्यों बुराई में हाथ डालता है, कि तू भी गिरे, और यहूदा भी तेरे साय गिरे?

11 परन्तु अमस्याह ने उसकी न सुनी; और इस्राएल के राजा यहोआश और यहूदा के राजा अमस्याह ने चढ़ाई करके यहूदा के बेतशेमेश में एक दूसरे को साम्हना देखा।

12 और यहूदा इस्राएल से हार गया, और अपने अपने डेरे को भाग गए।

13 और इस्राएल के राजा यहोआश ने यहूदा के राजा अमस्याह को जो योआश का पोता और अहज्याह का पोता था, बेतशेमेश में पकड़ लिया, और यरूशलेम को आया, और एप्रैम के फाटक से कोने के फाटक तक यरूशलेम की शहरपनाह को ढा दिया; सौ हाथ.

14 और उस ने सारा सोना, चान्दी, और जितने पात्र यहोवा के भवन में, और राजभवन के भण्डारों में थे, और बन्धुओं को भी ले लिया, और शोमरोन को लौट गया।

15 यहोआश के और काम, और उसके काम, और उसकी शक्ति, और यहूदा के राजा अमस्याह से वह किस प्रकार लड़ा, यह सब क्या इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखा है?

16 और यहोआश अपने पुरखाओं के संग सो गया, और उसे शोमरोन में इस्राएल के राजाओं के बीच मिट्टी दी गई; और उसका पुत्र यारोबाम उसके स्थान पर राज्य करने लगा।

17 और यहूदा का राजा यहोआश का पुत्र अमस्याह इस्राएल के राजा यहोआहाज के पुत्र योआश के मरने के पश्चात् पन्द्रह वर्ष तक जीवित रहा।

18 अमस्याह के और काम यहूदा के राजाओंके इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखे हैं?

19 और उन्होंने यरूशलेम में उसके विरूद्ध राजद्रोह की गोष्ठी की, और वह लाकीश को भाग गया; परन्तु उन्होंने उसके पीछे लाकीश को भेजा, और उसे वहीं मार डाला।

20 और वे उसे घोड़ोंपर चढ़ाकर ले आए, और यरूशलेम में उसके पुरखाओंके संग दाऊद के नगर में मिट्टी दी।

21 और यहूदा के सब लोगोंने अजर्याह को जो सोलह वर्ष का या, ले जाकर उसके पिता अमस्याह के स्यान पर राजा नियुक्त किया।

22 जब राजा अपने पुरखाओं के संग सो गया, तब उस ने एलत को दृढ़ करके यहूदा को फिर मिला दिया।

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