द्वितीय राजा 06
एलीशा सीरिया के राजा की सलाह को दैवीय रूप से बताता है
8 और अराम के राजा ने इस्राएल से युद्ध किया; और उस ने अपके कर्मचारियोंसे सम्मति करके कहा, मेरी छावनी अमुक स्यान में होगी।
9 परन्तु परमेश्वर के भक्त ने इस्राएल के राजा के पास कहला भेजा, कि उस स्यान से होकर जाने से चौकस रहो, क्योंकि अरामी लोग वहां चढ़ आए हैं।
10 इसलिथे इस्राएल के राजा ने उस स्यान में जिसके विषय में परमेश्वर के भक्त ने उस से कहा या, और जिसके विषय में उस ने उसे चिताया या, दूत भेजे, और वह वहां एक बार या दो बार नहीं रुका।
11 तब इस बात से अराम के राजा का मन घबरा गया, और उस ने अपके कर्मचारियोंको बुलाकर उन से कहा, क्या तुम मुझे न बता देते कि हम में से इस्राएल का राजा कौन है?
12 और उसके कर्मचारियों में से एक ने कहा, नहीं, मेरे प्रभु राजा; परन्तु एलीशा भविष्यद्वक्ता जो इस्राएल में है, वह इस्राएल के राजा को वे बातें बता देता है जो तू अपनी शयनकक्ष में कहता है।
13 और उस ने कहा, जा कर देखो कि वह कहां है, और भेज कर उसे बुला लाए। और उन्होंने उस से कहा, सुन, वह दोतान में है।
14 तब उस ने घोड़ों, रथोंऔर एक बड़ी सेना को वहां भेजा, और उन्होंने रात को आकर नगर को घेर लिया।
15 और परमेश्वर का जवान भोर को उठकर बाहर गया, और क्या देखा, कि घोड़ोंऔर रथोंसमेत एक सेना ने नगर को घेर लिया है; तब उसके सेवक ने उस से कहा, हे मेरे प्रभु! हम क्या करेंगे?
16 और उस ने कहा, मत डर; क्योंकि जो लोग उनके साथ हैं, उनसे कहीं अधिक लोग हमारे साथ हैं।
17 और एलीशा ने प्रार्थना करके कहा, हे प्रभु, उसकी आंखें खोल दे, कि वह देखे। और यहोवा ने उस जवान की आंखें खोल दीं, और उस ने देखा; और देखो, एलीशा के चारों ओर का पर्वत घोड़ों और अग्निमय रथों से भरा हुआ था।
18 और जब वे उसके पास आए, तब एलीशा ने यहोवा से प्रार्थना करके कहा, हे अन्धे लोगों को मार डाल। और एलीशा के कहने के अनुसार उस ने उसे अन्धा कर दिया।
19 तब एलीशा ने उन से कहा, यह मार्ग नहीं है, और न यह नगर है; मेरे पीछे आओ, और मैं तुम्हें उस आदमी तक पहुँचा दूँगा जिसे तुम ढूँढ़ रहे हो। और वह उन्हें सामरिया तक ले गया।
20 और ऐसा हुआ, कि जब वे शोमरोन में आए, तब एलीशा ने कहा, हे प्रभु, इन की आंखें खोल दे, कि वे देखें। यहोवा ने उनकी आंखें खोल दीं, और वे देख सके, और क्या देखा, कि वे सामरिया के बीच में हैं।
21 और जब इस्राएल के राजा ने उन्हें देखा, तब एलीशा से कहा, क्या मैं उन्हें मार डालूं, हे मेरे पिता, क्या मैं उन्हें मार डालूं?
22 परन्तु उस ने कहा, तू उनको न मारना; क्या आप उन लोगों को अपनी तलवार और धनुष से मार डालेंगे जिन्हें आपने बंदी बना लिया है? उनके आगे रोटी और पानी रख, कि वे खा-पीकर अपने स्वामी के पास जाएँ।
23 और उस ने उनके साम्हने बड़ी जेवनार की, और उन्होंने खाया पिया; और उनको विदा किया, और वे अपने स्वामी के पास चले गए; और फिर अरामी सेना इस्राएल के देश में प्रवेश न करने पाई।
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