द्वितीय राजा 06
सामरिया को घेर लिया गया
24 और इसके बाद ऐसा हुआ कि अराम के राजा बेनादाद ने अपनी सारी सेना इकट्ठी की, और चढ़ कर शोमरोन को घेर लिया।
25 और शोमरोन में बड़ा अकाल पड़ा, और देखो, उन्होंने उसे घेर लिया, यहां तक कि एक गदहे का सिर चान्दी के अस्सी टुकड़ों में बिकने लगा, और कबूतर के गोबर की चौथाई चौथाई चान्दी के पांच टुकड़ों में बिकने लगी।
26 और ऐसा हुआ कि जब राजा शहरपनाह के पास से गुजर रहा था, तो एक स्त्री ने उस पर चिल्लाकर कहा, हे मेरे प्रभु राजा, मेरी सहायता कर।
27 और उस ने उस से कहा, यदि यहोवा तेरी सहाथता न करे, तो मैं कहां से तेरी सहाथता करूंगा, खलिहान में से या रस के कुण्ड में से?
28 राजा ने उस से कहा, तेरे पास क्या है? और उस ने कहा, इस स्त्री ने मुझ से कहा, अपना पुत्र यहां दे, कि आज हम उसे खा लें, और कल मेरे पुत्र को भी खा लें।
29 इसलिये हम ने अपने बेटे को पकाकर खा लिया; परन्तु दूसरे दिन मैं ने उस से कहा, अपना पुत्र यहां दे, कि हम उसे खाएं; अपने बेटे को छुपाया.
30 और ऐसा हुआ, कि जब राजा ने उस स्त्री की बातें सुनीं, तब वह अपके वस्त्र फाड़, और शहरपनाह में से पार हो गया; और लोगों ने देखा, कि उसके भीतर शरीर पर टाट है।
31 और उस ने कहा, यदि शापात के पुत्र एलीशा का सिर आज भी उसके पास रहे, तो परमेश्वर मुझ से यह वरन् इस से भी अधिक करेगा।
32 तब एलीशा अपके घर में बैठा, और पुरनिये भी उसके साय बैठे। और राजा ने अपने साम्हने से एक पुरूष को भेजा; परन्तु दूत के पास आने से पहिले उस ने पुरनियोंसे कहा, क्या तुम ने देखा है, कि खूनी के पुत्र ने किस रीति से मेरा सिर काट लेने की आज्ञा दी है? देखो, जब दूत आए, तो उसके लिये द्वार बन्द करना, और द्वार समेत उसे धक्का देकर बाहर निकालना; क्या उसके पीछे उसके स्वामी के पैरों की आवाज नहीं आती?
33 और वह उन से बातें कर ही रहा या, कि दूत उसके पास आया; और कहा, देख, यह विपत्ति यहोवा की ओर से आती है; मैं प्रभु से और क्या आशा करूंगा?
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