quinta-feira, 2 de janeiro de 2025

द्वितीय राजा 03 एलीशा ने तीन राजाओं और उनकी सेनाओं को बचाया

 द्वितीय राजा 03

एलीशा ने तीन राजाओं और उनकी सेनाओं को बचाया


1 और यहूदा के राजा यहोशापात के अट्ठारहवें वर्ष में अहाब का पुत्र योराम शोमरोन में इस्राएल पर राज्य करने लगा, और बारह वर्ष तक राज्य करता रहा।

2 और उस ने वह काम किया जो यहोवा की दृष्टि में बुरा है; परन्तु न अपने पिता के समान, और न अपनी माता के समान; क्योंकि उस ने बाल की मूरत, जो उसके पिता ने बनवाई थी, छीन ली।

3 तौभी वह नबात के पुत्र यारोबाम के पापोंमें लगा रहा, जिस ने इस्राएल से पाप कराया या; वह उनसे अलग नहीं हुआ।

4 तब मोआबियों का राजा मेशा पशुओं का ठेकेदार या, और इस्राएल के राजा को एक लाख भेड़ के बच्चे, और एक लाख मेढ़ों का ऊन समेत कर देता था।

5 और जब अहाब मर गया, तब मोआबियोंके राजा ने इस्राएल के राजा से बलवा किया।

6 इसलिये उसी समय योराम ने शोमरोन से निकलकर सारे इस्राएल को ढूंढ़ लिया।

7 और उस ने जाकर यहूदा के राजा यहोशापात के पास कहला भेजा, कि मोआबियोंके राजा ने मुझ से बलवा किया है; क्या तुम मोआबियों से युद्ध करने को मेरे साथ चलोगे? और उस ने कहा, मैं ऊपर जाऊंगा; और मैं तेरे समान होऊंगा, मेरी प्रजा तेरी प्रजा के समान होगी, और मेरे घोड़े तेरे घोड़ों के समान होंगे।

8 और उस ने कहा, हम किस मार्ग से चढ़ें? तब उस ने कहा, एदोम के जंगल के मार्ग से।

9 और इस्राएल का राजा, और यहूदा का राजा, और एदोम का राजा चले गए; और वे सात दिन तक यात्रा करते रहे, और सेना और उनके पशुओं को जो उनके पीछे थे उनको जल न मिला।

10 तब इस्राएल के राजा ने कहा, हाय! कि यहोवा ने इन तीनों राजाओं को मोआबियोंके हाथ में करने के लिथे बुलाया।

11 और यहोशापात ने कहा, क्या यहां यहोवा का कोई भविष्यद्वक्ता नहीं है, कि हम उसके द्वारा यहोवा से पूछें? तब इस्राएल के राजा के सेवकों में से एक ने उत्तर दिया, यहां शापात का पुत्र एलीशा है, जो एलिय्याह के हाथों पर जल डाल रहा था।

12 और यहोशापात ने कहा, यहोवा का वचन उसके पास है। तब इस्राएल का राजा, यहोशापात, और एदोम का राजा उसके पास आए।

13 एलीशा ने इस्राएल के राजा से कहा, मुझे तुझ से क्या काम? अपने पिता के भविष्यद्वक्ताओं और अपनी माता के भविष्यद्वक्ताओं के पास जाओ। परन्तु इस्राएल के राजा ने उस से कहा, नहीं, क्योंकि यहोवा ने इन तीनों राजाओं को मोआबियोंके हाथ में कर देने के लिथे बुलाया है।

14 और एलीशा ने कहा, सेनाओं के यहोवा के जीवन की शपथ, जिसके सम्मुख मैं खड़ा रहता हूं, यदि मैं यहूदा के राजा यहोशापात का आदर न करता, तो मैं तेरी ओर दृष्टि न करता, और न तुझे देखता।

15 तो अब मेरे लिये एक स्पर्शरेखा ले आओ। और ऐसा हुआ कि जैसे ही उस ने उस पुरूष को छुआ, यहोवा का हाथ उस पर आ पड़ा।

16 और उस ने कहा, यहोवा यों कहता है, इस तराई में बहुत से गड़हे बनाओ;

17 क्योंकि यहोवा योंकहता है, तुम न तो आँधी देखोगे, और न मेंह देखोगे; तौभी यह तराई इतने जल से भर जाएगी कि तुम और तुम्हारे पशु और पशु दोनों पी सकेंगे।

18 तौभी यहोवा की दृष्टि में यह बात छोटी है; वह मोआबियोंको भी तुम्हारे हाथ में कर देगा।

19 और तुम सब दृढ़ नगरोंऔर सब उत्तम नगरोंको नाश करोगे, और सब अच्छे वृझोंको काट डालोगे, और जल के सब सोतोंको काट डालोगे, और सब अच्छे खेतोंको पत्थरोंसे नाश करोगे।

20 और बिहान को जब अन्नबलि चढ़ाया गया, तब क्या हुआ कि एदोम के मार्ग से जल बहने लगा, और भूमि जल से भर गई।

21 जब सब मोआबियोंने सुना, कि राजा हम से लड़ने को चढ़ आए हैं, तो अपके कमर बान्धे हुए सब को बुला लिया, और सिवानोंपर खड़े हो गए।

22 और जब वे भोर को उठे, और सूर्य जल के ऊपर निकला, तब मोआबियों ने जल को अपने साम्हने लोहू के समान लाल देखा।

23 और उन्होंने कहा, यह लोहू है; निःसन्देह राजाओं ने एक दूसरे को तलवार से नष्ट किया, और एक दूसरे को मार डाला! अब शिकार ले लो, मोआबियो!

24 परन्तु जब वे इस्राएल की छावनी के पास पहुंचे, तब इस्राएलियोंने उठकर मोआबियोंको जो उनके साम्हने से भाग गए थे उनको मार डाला, और उनको उन्हीं के देश में घात किया, और मोआबियोंको वहां भी मार डाला।

25 और उन्होंने नगरोंको ढा दिया, और सब अच्छे खेतोंमें अपना अपना पत्थर फेंककर उनको भर दिया, और जल के सब सोते बन्द कर दिए, और सब अच्छे अच्छे वृक्ष काट डाले, यहां तक ​​कि केवल पत्थर ही रह गए। किर-हरेसेत में, परन्तु गोफन चलाने वालों ने उसे घेर लिया और उसे घायल कर दिया।

26 परन्तु जब मोआबियोंके राजा ने देखा, कि लड़ाई मुझ पर प्रबल हो गई है, तब उस ने एदोम के राजा पर चढ़ाई करने को सात सौ तलवार चलानेवाले पुरूष संग लिये, परन्तु वे कुछ न कर सके।

27 तब उस ने अपके पहिलौठे पुत्र को जो उसके स्यान पर राज्य करने को या, ले कर शहरपनाह पर होमबलि करके चढ़ाया; इस कारण इस्राएल में बड़ा क्रोध भड़का; इस कारण वे उसके पास से चले गए, और अपने देश को लौट गए।

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