द्वितीय राजा 02
एलीशा, एलिय्याह का उत्तराधिकारी
12 जब एलीशा ने यह देखा, तब चिल्लाकर कहा, हे मेरे पिता, हे मेरे पिता, हे इस्राएल के रथ, और उनके सवार! और उस ने उसे फिर कभी न देखा; और उसके वस्त्र पकड़कर फाड़ डाले।
13 और उस ने एलिय्याह का बागा जो उस पर से गिर गया या, उठाया, और घूमकर यरदन के तीर पर खड़ा हुआ।
14 और उस ने एलिय्याह का कपड़ा जो उस पर से गिरा या, उठाकर जल पर मारा, और कहा, एलिय्याह का परमेश्वर यहोवा कहां है? तब उस ने जल पर मारा, और वे एक ओर और दूसरी ओर दो भाग हो गए; और एलीशा पार हो गया।
15 और भविष्यद्वक्ताओं के चेलों ने जो यरीहो में साम्हने खड़े थे, उसे देखकर कहा, एलिय्याह का आत्मा एलीशा पर रहता है। और वे उस से भेंट करने को आए, और उसके साम्हने भूमि पर गिरे।
16 और उन्होंने उस से कहा, देख, तेरे दासोंके पास पचास शूरवीर हैं; अब वे तेरे स्वामी को ढूंढ़ने को चलें; सम्भव है कि प्रभु की आत्मा ने उसे उठा लिया हो; और उसे एक घाटी में डाल दिया। परन्तु उस ने कहा, उन्हें मत भेजो।
17 परन्तु वे उसे यहां तक दबाते रहे, कि वह ऊब गया; और उन से कहा, भेजो। और उन्होंने पचास पुरूष भेजे, और तीन दिन तक उसकी खोज करते रहे, परन्तु वह न मिला।
18 जब वह यरीहो में रह रहा या, तब वे उसके पास लौट आए; और उस ने उन से कहा, क्या मैं ने तुम से न कहा या, कि न जाओ?
19 और नगर के पुरूषोंने एलीशा से कहा, सुन, इस नगर का निवास अच्छा है, जैसा मेरे प्रभु की इच्छा है; परन्तु जल बुरा है, और भूमि बंजर है।
20 और उस ने कहा, मेरे लिथे नया साग ले आओ, और उस में नमक मिला दो। और वे उसे उसके पास ले आये।
21 तब वह बाहर निकलकर जल के सोते के पास गया, और उस में नमक डाला; और उस ने कहा, यहोवा यों कहता है, मैं इन जल को चंगा कर दूंगा; उनमें फिर कोई मृत्यु या बाँझपन नहीं होगा।
22 और एलीशा के कहे हुए वचन के अनुसार वे जल आज तक सुरक्षित बने रहे।
23 तब वह वहां से बेतेल को गया; और जब वह आगे बढ़ रहा था, तो कितने छोटे लड़के नगर से निकले, और उसका ठट्ठा करके कहने लगे, हे गंजे, चढ़, हे गंजा, ऊपर आ!
24 और जब वह पीछे फिरा, तब उनको देखकर यहोवा के नाम से शाप दिया; तब जंगल में से दो भालू निकले, और उन में से बयालीस बच्चों को फाड़ डाला।
25 और वह वहां से कर्मेल पहाड़ को गया, और वहां से शोमरोन को लौट आया।
Nenhum comentário:
Postar um comentário