terça-feira, 11 de março de 2025

द्वितीय इतिहास 04 वेदी और कांस्य समुद्र

 द्वितीय इतिहास 04

वेदी और कांस्य समुद्र

1 और उस ने बीस हाथ लम्बी, बीस हाथ चौड़ी, और दस हाथ ऊंची धातु की एक वेदी भी बनाई।

2 और उस ने ढालकर समुद्र बनाया, एक छोर से दूसरे छोर तक दस हाथ, और गोल, और पांच हाथ ऊंचा; उसके चारों ओर तीस हाथ की रस्सी बाँधी गई।

3 और उसके नीचे बैलों की आकृतियां बनीं, जो उसके चारों ओर कमर बान्धती थीं, और वे उस झील को चारों ओर दस हाथ तक घेरती थीं; और उसके पास अपनी ढलाई के कारखाने में बैलों की दो कतारें ढली हुई थीं।

4 और वह बारह बैलोंपर बैठा, तीन उत्तर की ओर, और तीन पच्छिम की ओर, और तीन दक्खिन की ओर, और तीन पूर्व की ओर मुख किए हुए थे; और उनके ऊपर समुद्र था; और उनका पिछला भाग भीतर की ओर था।

5 और वह एक बित्ता मोटा या, और उसकी किनारी प्याले के किनारी के समान, वा बांस के प्याले के समान बनी, और उसकी क्षमता तीन हजार प्याले की थी।

6 और उस ने दस हौदियां भी बनाईं; और उस ने उन में धोने के लिथे पांच दाहिनी ओर, और पांच बाईं ओर रख दिए; होमबलि का जो कुछ या, वह उन में धोया गया; परन्तु याजकोंके धोने के लिथे हौद था।

7 और उस ने उनके आकार के अनुसार सोने की दस दीवटें बनाकर मन्दिर में रख दीं, पांच दाहिनी ओर, और पांच बाईं ओर।

8 और उस ने दस मेजें बनाकर मन्दिर में रखवाईं, पांच दाहिनी ओर, और पांच बाईं ओर; और उस ने सोने के सौ कटोरे भी बनवाए।

9 और उस ने याजकोंके लिये आंगन, और बड़ा आंगन भी बनाया, और आंगन के किवाड़ोंको भी उस ने पीतल से मढ़वाया।

10 और समुद्र ने उसे दाहिनी ओर पूर्व और दक्खिन की ओर खड़ा कर दिया।

11 हीराम ने घड़े, फावड़ियां, और कटोरे भी बनाए; इस प्रकार हीराम ने परमेश्वर के भवन में वह काम पूरा किया जो उस ने राजा सुलैमान के लिये किया या।

12 और दो खम्भे, और गोल, और खम्भोंके सिरोंपर की दो छड़ियां, और खम्भोंके सिरोंपर लगे हुए दोनों गोलोंको ढांपने के लिथे दो जाल।

13 और दोनोंजालोंके लिथे चार सौ अनार, अर्यात्‌ खम्भोंके ऊपर के खम्भोंके दोनोंगोलोंको ढांपने के लिथे एक एक जाल के लिथे अनारोंकी दो दो पंक्तियां।

14 और उस ने कुसिर्यां भी बनाई, और कुसिर्योंपर सींकें भी लगाईं;

15 एक समुद्र, और उसके नीचे बारह बैल;

16 इसी रीति से हंडे, फावड़े, कांटे, और सारा सामान हीराम अबीहू ने राजा सुलैमान के लिये यहोवा के भवन के लिथे शुद्ध किए हुए तांबे का बनाया।

17 राजा ने उनको यरदन के अराबा में सुक्कोत और जेरेदाथा के बीच की चिकनी मिट्टी में डलवा दिया।

18 और ये सब पात्र सुलैमान ने बहुतायत से बनवाए, क्योंकि पीतल का तौल तौल में न आता था।

19 सुलैमान ने परमेश्वर के भवन के लिथे सब पात्र, और सोने की वेदी, और मेजें जिन पर भेंट की रोटियां रखी जाती थीं, भी बनाईं।

20 और कैंडलस्टिक्स अपने ललित सोने के लैंप के साथ, उन्हें ओरेकल से पहले रिवाज के अनुसार प्रकाश करने के लिए।

21 और फूल, और दीपक, और दीवटें सोने के, वरन परम उत्तम सोने के बने।

22 और कांटे, और कटोरे, और कटोरे, और धूपदान, बहुत चोखे सोने के बने; और भवन के प्रवेश द्वार, और पवित्रस्थान के भीतर के किवाड़े, और भवन के द्वार भी सोने के बने।

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