द्वितीय इतिहास 23
यहोयादा ने जो सन्धि की
16 और यहोयादा ने अपने, और प्रजा के, और राजा के बीच यह वाचा बान्धी, कि वे यहोवा की प्रजा ठहरेंगे।
17 तब सब लोगोंने बाल के भवन में घुसकर उसे ढा दिया, और उसकी वेदियांऔर मूरतोंको तोड़ डाला, और बाल के याजक मत्तान को वेदियोंके साम्हने घात किया।
18 और यहोयादा ने यहोवा के भवन में पदों को उन याजकों के हाथ में ठहराया, जिन्हें दाऊद ने यहोवा के भवन में इसलिये ठहराया या, कि वे मूसा की व्यवस्था के अनुसार दाऊद की आज्ञा के अनुसार आनन्द और जयजयकार के साथ यहोवा के होमबलि चढ़ाएं।
19 और उस ने यहोवा के भवन के फाटकोंपर द्वारपाल नियुक्त किए, कि कोई किसी कारण से अशुद्ध मनुष्य उस में प्रवेश न कर सके।
20 और उस ने सूबेदारोंऔर शूरवीरोंऔर प्रजा पर प्रभुता करनेवालोंको, और सब साधारण लोगोंको साथ लिया, और राजा को यहोवा के भवन से बाहर ले गया, और बड़े फाटक से राजभवन में प्रवेश किया, और राजा को राज्य की गद्दी पर बैठाया।
21 और अतल्याह को तलवार से घात करने के बाद सब लोगोंने आनन्द किया, और नगर में शान्ति हुई।
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