द्वितीय इतिहास 24
योआश पर परमेश्वर का न्याय
23 और एक वर्ष के भीतर ऐसा हुआ, कि अराम की सेना उस पर चढ़ाई करके यहूदा और यरूशलेम तक पहुंची, और प्रजा के सब हाकिमोंको प्रजा में से नाश कर डाला; और उन्होंने अपनी सारी लूट दमिश्क के राजा के पास भेज दी।
24 क्योंकि अरामियों की सेना थोड़े पुरूषोंके साथ आई, तौभी यहोवा ने बड़ी भीड़ उनके हाथ में कर दी, क्योंकि उन्होंने अपने पितरोंके परमेश्वर यहोवा को त्याग दिया था। इस प्रकार उन्होंने योआश के विरुद्ध सज़ा दी।
25 और जब वे उसके पास से चले गए (क्योंकि उन्होंने उसे बड़ी बीमारी में छोड़ दिया था) तो उसके सेवकों ने यहोयादा याजक के पुत्र के खून के कारण उससे राजद्रोह की गोष्ठी करके उसे उसके बिछौने पर ही मार डाला, और वह मर गया; और उसे दाऊदपुर में मिट्टी दी, परन्तु राजाओं की कब्रों में नहीं दफनाया।
26 उसके विरूद्ध राजद्रोह की गोष्ठी करनेवालोंमें से ये थे, अर्थात अम्मोनी शिमात का पुत्र जाबाद, और मोआबी शिनरेत का पुत्र योसाबाद।
27 और उसकी सन्तान का, और उस पर जो पद सौंपा गया था उसकी बड़ाई, और परमेश्वर के भवन की स्थापना के विषय में, देखो, यह सब राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखा है। और उसका पुत्र अमस्याह उसके स्यान पर राज्य करने लगा।
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