segunda-feira, 17 de março de 2025

द्वितीय इतिहास 15 आसा ने मूर्तिपूजा को समाप्त कर दिया और प्रभु की वाचा को नवीनीकृत किया

 द्वितीय इतिहास 15

आसा ने मूर्तिपूजा को समाप्त कर दिया और प्रभु की वाचा को नवीनीकृत किया

1 तब परमेश्वर का आत्मा ओबेद के पुत्र अजर्याह पर उतरा।

2 और वह आसा से भेंट करने को निकला, और उस से कहा, हे आसा, हे सब यहूदा और बिन्यामीन, मेरी सुनो; जब तक तुम यहोवा के संग हो तब तक वह तुम्हारे संग रहेगा, और यदि तुम उसकी खोज करोगे, तो उसे पाओगे; परन्तु यदि तुम उसे छोड़ोगे, तो वह तुम्हें छोड़ देगा।

3 और इस्राएल बहुत दिन तक सच्चे परमेश्वर से रहित, और उसे सिखानेवाला याजक और व्यवस्था से रहित रहा।

4 परन्तु जब वे संकट में पड़कर इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की ओर फिरे, और उसे ढूंढ़ा, तब उसे मिला।

5 और उन दिनों में न तो बाहर जानेवाले को और न भीतर आनेवाले को शान्ति मिलती थी, वरन उन देशोंके सब रहनेवालोंपर बहुत विपत्तियां आ पड़ीं।

6 क्योंकि एक मनुष्य से एक मनुष्य, और एक नगर से एक नगर, वे टुकड़े-टुकड़े हो गए; क्योंकि परमेश्वर ने उनको उनके सारे संकट से व्याकुल किया।

7 परन्तु हियाव बान्धो, और अपने हाथ ढीले न होने दो; क्योंकि तुम्हारे काम का फल है।

8 जब आसा ने ये बातें और ओबेद के पुत्र भविष्यद्वक्ता की भविष्यद्वाणी सुनी, तब उस ने यत्न करके यहूदा और बिन्यामीन के सारे देश में से, और जो नगर उस ने एप्रैम के पहाड़ी देश में ले लिए थे उन में से घृणित वस्तुएं दूर कीं; और यहोवा की जो वेदी यहोवा के ओसारे के साम्हने थी उसको उसने नया बनाया।

9 और उस ने सारे यहूदा और बिन्यामीन को, और उनके साय एप्रैम, मनश्शे, और शिमोन के परदेशियोंको इकट्ठा किया; क्योंकि यह देखकर कि उसका परमेश्वर यहोवा उसके संग रहता है, इस्राएल से बड़ी भीड़ उसके पास आने लगी।

10 और तीसरे महीने में वे यरूशलेम में इकट्ठे हुए; आसा के राज्य के दसवें वर्ष में।

11 और उसी दिन उन्होंने उस लूट में से जो वे ले आए थे, छ: सौ बैल और छ: हजार भेड़-बकरियां यहोवा के लिये बलि करके चढ़ाई।

12 और उन्होंने अपके पितरोंके परमेश्वर यहोवा को अपके सारे मन और अपके सारे प्राण से ढूंढ़ने की वाचा बान्धी;

13 और छोटे से लेकर बड़े तक, और पुरूष से लेकर नारी तक, जो कोई इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की खोज नहीं करता, वह सब मर जाएगा।

14 और उन्होंने ऊंचे शब्द से, आनन्द से, तुरहियां और नरसिंगे बजाते हुए यहोवा की शपथ खाई।

15 और इस शपथ से सारा यहूदी आनन्दित हुआ; क्योंकि उन्होंने अपने सारे मन से शपथ खाई, और अपनी सारी इच्छा से उसको ढूंढ़ा, और उसे पाया; और यहोवा ने उनको चारोंओर से विश्रम दिया।

16 और राजा आसा की माता माका को भी उस ने अपदस्थ कर लिया, कि वह फिर रानी न बने; क्योंकि उस ने अशेरा को भयानक मूरत बनाया था; और आसा ने उसकी भयानक मूर्ति को ढा दिया, और उसके टुकड़े टुकड़े कर डाले, और किद्रोन नाले के पास जला दिया।

17 परन्तु ऊंचे स्थान इस्राएल से न छीने गए; तौभी आसा का हृदय जीवन भर परिपूर्ण रहा।

18 और वह वस्तुएं जो उसके पिता ने अर्पण की थीं, और जो वस्तुएं उस ने आप ही अर्पण की थीं, अर्यात् चान्दी, सोना, और पात्र भी परमेश्वर के भवन के लिथे ले आया।

19 और आसा के राज्य के पैंतीसवें वर्ष तक कोई युद्ध न हुआ।

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