द्वितीय इतिहास 29
हिजकिय्याह ने परमेश्वर की आराधना को पुनः स्थापित किया
20 तब राजा हिजकिय्याह बिहान को तड़के उठा, और नगर के हाकिमोंको इकट्ठा करके यहोवा के भवन को गया।
21 और वे राज्य और पवित्रस्थान और यहूदा के निमित्त प्रायश्चित्त करने के लिथे सात बैल, और सात मेढ़े, और सात भेड़ के बच्चे, और सात बकरे ले आए, और हारून के पुत्रोंसे जो याजक थे, उन से कहा, कि इन्हें यहोवा की वेदी पर चढ़ाओ।
22 और उन्होंने बैलोंको बलि किया, और याजकोंने लोहू लेकर वेदी पर छिड़क दिया; उन्होंने मेढ़ों को भी बलि किया, और उनका लहू वेदी पर छिड़का; वैसे ही उन्होंने मेमनों को भी बलि किया, और उनका लहू वेदी पर छिड़का।
23 तब वे बकरोंको पापबलि करके राजा और मण्डली के साम्हने ले आए, और उन पर हाथ रखे।
24 और याजकों ने उनको घात किया, और सारे इस्राएल का मेल कराने के लिये उनके लोहू को वेदी पर पापबलि करके चढ़ाया; क्योंकि राजा ने आदेश दिया था कि सारे इस्राएल के लिये होमबलि और पापबलि चढ़ाया जाए।
25 और उस ने दाऊद, और राजा के दशीं गाद, और नातान भविष्यद्वक्ता की आज्ञा के अनुसार झांझ, सारंगियां, और सारंगियां लिये हुए लेवियोंको यहोवा के भवन में बैठाया;
26 तब लेवीय दाऊद के बाजे लिये हुए, और याजक तुरहियां लिये हुए खड़े हुए।
27 और हिजकिय्याह ने उनको वेदी पर होमबलि चढ़ाने की आज्ञा दी, और जिस समय होमबलि चढ़ने लगा, उसी समय इस्राएल के राजा दाऊद की तुरहियां और बाजे बजते हुए यहोवा का भजन होने लगा।
28 और सारी मण्डली गीत गाने और तुरहियां बजने पर गिर पड़ी; यह सब तब तक होगा जब तक कि प्रलय समाप्त न हो जाए।
29 और जब वह उसे चढ़ा चुका, तो राजा और उसके संग के सब लोगों ने गिरकर दण्डवत् किया।
30 तब राजा हिजकिय्याह और हाकिमोंने लेवियोंको दाऊद और आसाप दशी के वचनोंके द्वारा यहोवा की स्तुति करने को कहा। और उन्होंने आनन्द से उसकी स्तुति की, और झुककर दण्डवत् किया।
31 हिजकिय्याह ने उत्तर दिया, अब तुम यहोवा के पास इकट्ठे हो गए हो; निकट आओ और यहोवा के भवन में बलिदान और स्तुति का प्रसाद ले आओ। और मण्डली मेलबलि और स्तुतिबलि ले आई, और जितनों के मन में ऐसी अभिलाषा थी वे सब होमबलि लाए।
32 और मण्डली के लोग जो होमबलि ले आए, उनकी गिनती सत्तर बैल, एक सौ मेढ़े, और दो सौ भेड़ के बच्चे थे; ये सब यहोवा के लिये होमबलि थे।
33 और पवित्र वस्तुएं भी थीं, अर्थात छ: सौ बैल, और तीन हजार भेड़-बकरियां।
34 परन्तु याजक बहुत कम थे, और वे सब होमबलियोंकी खाल न निकाल सके; इस कारण उनके भाई लेवीय उन की सहायता तब तक करते रहे, जब तक काम पूरा न हुआ, और जब तक दूसरे याजकों ने अपने आप को पवित्र न किया; क्योंकि लेवीय याजकों से अधिक सीधे मन के थे और अपने आप को पवित्र मानते थे।
35 और होमबलि भी बहुतायत में था, मेलबलि की चर्बी और होमबलि के लिथे दाखमधु भी। इस प्रकार प्रभु के घर की सेवकाई स्थापित हुई।
36 और हिजकिय्याह और सारी प्रजा आनन्दित हुई, क्योंकि परमेश्वर ने प्रजा को तैयार किया था; क्योंकि काम जल्दबाजी में किया गया था.
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