sexta-feira, 14 de março de 2025

द्वितीय इतिहास 09 सुलैमान का धन और वैभव

 द्वितीय इतिहास 09

सुलैमान का धन और वैभव

13 और जो सोना एक वर्ष में सुलैमान के पास आता था उसका तौल छः सौ छियासठ किक्कार था,

14 इसके अलावा जो व्यापारी और व्यापारी लाए थे, अर्यात्‌ अरब के सब राजा और उस देश के हाकिम भी सुलैमान के पास सोना चान्दी लाते थे।

15 और सुलैमान ने दो सौ शेकेल कुटा हुआ सोना भी बनाया; और एक एक के लिथे उसने छ: सौ शेकेल कुटा हुआ सोना तौलवाया,

16 और गढ़े हुए सोने की तीन सौ ढालें; प्रत्येक ढाल के लिये उसने तीन सौ शेकेल सोना तौला; और सुलैमान ने उनको लबानोन के जंगल में अपने घर में रखा।

17 और राजा ने हाथीदांत का एक बड़ा सिंहासन बनवाया, और उसको चोखे सोने से मढ़ा।

18 और सिंहासन में छः सीढ़ियां थीं, और सिंहासन से जुड़ा हुआ एक सोने का मंच था, और आसन के स्थान पर दोनों ओर पीठें थीं: और पीठ के पास दो सिंह बने थे।

19 और छः सीढ़ियोंपर दोनोंअलंगोंपर बारह सिंह बने हुए थे; ऐसा किसी राज्य में कभी न हुआ या।

20 और राजा सुलैमान के पीने के सब पात्र सोने के थे, और लबानोन वन भवन के सब पात्र भी चोखे सोने के थे; सुलैमान के दिनों में चान्दी कुछ तुच्छ समझी जाती थी।

21 क्योंकि जब राजा के जहाज हीराम के सेवकोंके साय तर्शीश को जाते थे, तब जहाज तीन तीन वर्ष में एक बार तर्शीश से लौट आते थे, और सोना, चान्दी, हाथीदांत, चिल्लानेवाले बन्दर, और मोर ले आते थे।

22 सो राजा सुलैमान धन और बुद्धि में पृय्वी भर के सब राजाओं से बढ़कर हुआ।

23 और पृय्वी के सब राजा सुलैमान का दर्शन करना चाहते थे, और उसकी बुद्धि सुनना चाहते थे, जो परमेश्वर ने उसके मन में दी थी।

24 और वे प्रति वर्ष अपनी अपनी भेंट, अर्थात सोने के पात्र, और वस्त्र, कवच, और सुगन्धद्रव्य, घोड़े, और खच्चर, सब कुछ ले आए।

25 और सुलैमान के पास घोड़ोंऔर रथोंके चार हजार अस्तबल, और बारह हजार सवार थे; और उनको उसने रथोंवाले नगरोंमें, और यरूशलेम में राजा के पास रखा।

26 और वह महानद से ले कर पलिश्तियों के देश तक, और मिस्र के सिवाने तक सब राजाओं पर प्रभुता करता था।

27 और राजा ने यरूशलेम में चान्दी को पत्थरोंके समान, और देवदारों को मैदानोंके जंगली अंजीर के वृक्षोंके समान बहुतायत से बनाया।

28 और वे मिस्र और उस सब देश से सुलैमान के पास घोड़े ले आए।

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