द्वितीय इतिहास 18
गिलाद के रामोत के विरुद्ध युद्ध और अहाब की मृत्यु
28 इसलिये इस्राएल का राजा और यहूदा का राजा यहोशापात गिलाद के रामोत पर चढ़ गए।
29 और इस्राएल के राजा ने यहोशापात से कहा, मैं भेष बदलकर युद्ध में उतरूंगा; लेकिन तुम अपने कपड़े पहन लो. इसलिये इस्राएल के राजा ने भेष बदला, और वे युद्ध में उतरे।
30 परन्तु अराम के राजा ने अपने रथोंके प्रधानोंको यह आज्ञा दी, कि तुम न छोटे से लड़ोगे, न बड़े से, परन्तु केवल इस्राएल के राजा से लड़ोगे।
31 और ऐसा हुआ, कि जब यहोशापात के रयोंके प्रधानोंने देखा, तब कहा, यह इस्राएल का राजा है; और उन्होंने लड़ने के लिथे उसे घेर लिया; परन्तु यहोशापात ने चिल्लाया, और यहोवा ने उसकी सहायता की। और परमेश्वर ने उन्हें अपने से दूर कर दिया।
32 क्योंकि जब रथोंके प्रधानोंने देखा, कि वह इस्राएल का राजा नहीं है, तब उन्होंने उसका पीछा करना छोड़ दिया।
33 तब एक मनुष्य ने सरलता से अपना धनुष चढ़ाकर इस्राएल के राजा के जोड़ और चपरास के बीच में मारा। तब उस ने ढोनेवाले से कहा, तेरा हाथ जीवित रहे, और मुझे सेना से निकाल ले, क्योंकि मैं बहुत घायल हो गया हूं।
34 और वहां युद्ध छिड़ गया, परन्तु इस्राएल का राजा सांझ तक अरामियोंके साम्हने रथ पर खड़ा रहा, और सूर्य डूबने पर वह मर गया।
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