quarta-feira, 19 de março de 2025

द्वितीय इतिहास 20 परमेश्वर यहोशापात को उसके शत्रुओं पर विजय प्रदान करता है

 द्वितीय इतिहास 20

परमेश्वर यहोशापात को उसके शत्रुओं पर विजय प्रदान करता है

1 और इसके बाद ऐसा हुआ कि मोआब और अम्मोनियोंऔर उनके साथ अम्मोनियोंमें से कुछ और लोग यहोशापात से लड़ने को आए।

2 तब कितनों ने आकर यहोशापात को यह समाचार दिया, कि समुद्र के उस पार से और अराम से एक बड़ी भीड़ तुझ पर चढ़ाई करने को आती है; और देखो, वे हत्शतामर अर्थात एंगरदी के पास पहुंच गए हैं।

3 तब यहोशापात डर गया, और यहोवा की खोज करने लगा; और सारे यहूदा में उपवास का प्रचार करवाया।

4 और यहूदा यहोवा से सहायता मांगने को इकट्ठे हुए; वे यहूदा के सब नगरों से भी यहोवा की खोज में आए।

5 और यहोशापात यहूदा और यरूशलेम की मण्डली में यहोवा के भवन में नये आंगन के साम्हने खड़ा हुआ।

6 और उस ने कहा, हाय! हे प्रभु, हमारे पितरों के परमेश्वर, क्या तू स्वर्ग में परमेश्वर नहीं है? क्योंकि तू जाति जाति के सब राज्योंपर प्रभुता करता है, और तेरे हाथ में बल और सामर्थ है, और कोई तेरा विरोध नहीं कर सकता।

7 हे हमारे परमेश्वर, क्या तू ने इस देश के निवासियोंको अपनी प्रजा इस्राएल के साम्हने से निकालकर इसे अपने मित्र इब्राहीम के वंश को सदा के लिये नहीं दे दिया?

8 और वे वहीं रहने लगे; और उन्होंने यह कहकर उसमें तेरे नाम के लिथे एक पवित्रस्थान बनाया,

9 यदि तलवार, न्याय, मरी, वा महंगी, कोई विपत्ति हम पर आ पड़े, तो हम इस भवन के साम्हने और तेरे साम्हने उपस्थित होंगे; क्योंकि इस घर में तेरा नाम है; और हम संकट में तेरी दोहाई देंगे, और तू हमारी सुनेगा, और हमें बचाएगा।

10 इसलिये अब देखो, अम्मोनियोंऔर मोआबियोंऔर सेईर के पहाड़ी देश के लोग, जब वे मिस्र देश से निकले थे, तब तुम ने इस्राएल को उनके बीच से होकर जाने न दिया, वरन उनके साम्हने से मुंह फेर लिया और उनको नाश न किया,

11 देखो, वे हमें बदला देते हैं, और आकर हमें तेरे उस निज भाग से जिसका निज भाग तू ने हम को ठहराया है निकाल देते हैं।

12 ओह! हे हमारे परमेश्वर, क्या तू उनका न्याय न करेगा? क्योंकि इस बड़ी भीड़ के साम्हने जो हम पर चढ़ाई करती है, हम में कुछ शक्ति नहीं, और हम नहीं जानते कि हम क्या करेंगे; लेकिन हमारी नजर आप पर है.

13 और सब यहूदी अपने बाल-बच्चे, स्त्रियां, और बाल-बच्चों समेत यहोवा के साम्हने खड़े हुए।

14 तब यहोवा का आत्मा मण्डली के बीच में यहजीएल पर, जो जकर्याह का पुत्र, यह बनायाह का पुत्र, यह यीएल का पुत्र, और मत्तन्याह का पुत्र, जो आसाप के वंश में से एक लेवी था, उस पर उतरा।

15 और उस ने कहा, हे सब यहूदा, हे यरूशलेम के निवासियों, हे राजा यहोशापात, कान लगाओ। यहोवा तुम से यों कहता है, इस बड़ी भीड़ से मत डरो, और तुम्हारा मन कच्चा न हो; क्योंकि लड़ाई तुम्हारी नहीं, परन्तु परमेश्वर की है।

16 कल तू उनका साम्हना करने को चढ़ाई करना; देख, वे सीस की ढलान पर चढ़ रहे हैं, और तराई के सिरे पर यरूएल नाम जंगल के साम्हने उनको पाओगे।

17 इस लड़ाई में तुम्हें लड़ना न पड़ेगा; हे यहूदा, हे यरूशलेम, ठहरो, खड़े रहो, और अपने बीच में यहोवा का उद्धार देखो; मत डरो, और न तुम्हारा मन कच्चा हो; कल तुम उन से भेंट करने को निकल जाना, क्योंकि यहोवा तुम्हारे संग रहेगा।

18 तब यहोशापात मुंह के बल गिर पड़ा; और सब यहूदा और यरूशलेम के निवासी यहोवा के साम्हने झुककर यहोवा को दण्डवत् करने लगे।

19 और कहातियोंऔर कोरहियोंमें से लेवीय खड़े होकर इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की स्तुति ऊंचे शब्द से करने लगे।

20 और बिहान को वे सबेरे उठकर तकोआ के जंगल में निकल गए; और जब वे बाहर जा रहे थे, तब यहोशापात ने खड़े होकर कहा, हे यहूदा, हे यरूशलेम के निवासियों, मेरी सुनो; अपने परमेश्वर यहोवा पर विश्वास रखो, और तुम दृढ़ हो जाओगे; उसके भविष्यवक्ताओं पर विश्वास करो, और तुम समृद्ध होगे।

21 और उस ने लोगोंसे सम्मति ली, और यहोवा के लिथे गायक ठहराए, कि पवित्र महामहिम की स्तुति करें, और हथियारबंद पुरूषोंके आगे आगे जाकर कहें, यहोवा की स्तुति करो, क्योंकि उसकी करूणा सदा की है।

22 और जब वे आनन्द और स्तुति करने लगे, तब यहोवा ने अम्मोनियोंऔर मोआबियोंऔर सेईर के पहाड़ी देश के लोगोंपर घात लगाकर जो यहूदा पर चढ़ आए, और मारे गए।

23 क्योंकि अम्मोनियोंऔर मोआबियोंने सेईर के पहाड़ी देश के निवासियोंके विरूद्ध चढ़ाई की, और उनको नाश किया; और जब उन्होंने सेईर के निवासियोंको नाश किया, तब अपने आप को नाश करने में एक दूसरे की सहायता की।

24 इतने में यहूदा जंगल के गुम्मट पर पहुंचा; और उन्होंने भीड़ पर दृष्टि की, और क्या देखा, कि लोथ भूमि पर पड़ी हैं, और कोई नहीं बचा।

25 और यहोशापात और उसकी प्रजा उनका लूटने को आई, और उन में बहुत सी लोथें और बहुमूल्य पात्र पाए; और इतना माल अपने लिये ले लिया कि फिर न ले सकते थे; और वह लूट बहुत हो गई, इसलिये तीन दिन तक लूटते रहे।

26 और चौथे दिन वे बेराका नाम तराई में इकट्ठे हुए; क्योंकि वहां उन्होंने यहोवा की स्तुति की; इस कारण उन्होंने उस स्यान का नाम बराका नाम तराई रखा, जो आज तक बना हुआ है।

27 तब यहूदा और यरूशलेम के सब पुरूष आनन्द के साथ यरूशलेम को आने को उनके आगे यहोशापात को लेकर लौट गए; क्योंकि यहोवा ने उनको उनके शत्रुओं के विषय में आनन्दित किया था।

28 और वे सारंगियां, वीणाएं और तुरहियां बजाते हुए यरूशलेम में यहोवा के भवन में आए।

29 और उस देश के सब राज्योंके लोगोंमें यह सुनकर कि यहोवा इस्राएल के शत्रुओंसे लड़ा है, परमेश्वर का भय समा गया।

30 और यहोशापात का राज्य शान्त हो गया, और उसके परमेश्वर ने उसे चारों ओर से विश्रम दिया।

31 और यहोशापात यहूदा पर राज्य करता रहा; जब वह राज्य करने लगा तब वह पैंतीस वर्ष का या, और पच्चीस वर्ष तक यरूशलेम में राज्य करता रहा; और यह उसकी माता का नाम, अजूबा, की बेटी था सिली.

32 और वह अपने पिता आसा की लीक पर चला, और उस से अलग न हुआ, और वही करता रहा जो यहोवा की दृष्टि में ठीक है।

33 तौभी ऊंचे स्थान न हटाए गए, क्योंकि लोगों ने अब तक अपने मन को अपने पितरोंके परमेश्वर के लिये तैयार न किया या।

34 अब यहोशापात की बाकी सफलताएं, आदि और अंतिम, देखो, वे हनानी के पुत्र येहू के अभिलेखों में लिखी हैं, जिन्होंने उन्हें इस्राएल के राजाओं की पुस्तक में दर्ज किया था।

35 परन्तु इसके बाद यहूदा के राजा यहोशापात ने इस्राएल के राजा अहज्याह से मेल कर लिया, और अहज्याह ने बड़ी दुष्टता से काम किया।

36 और उन्होंने तर्शीश को जाने के लिथे जहाज बनाने को उस से मेल किया; और एस्योनगेबेर में जहाज बनाए।

37 परन्तु मारेशावासी दोदवा के पुत्र एलीएजेर ने यहोशापात के विरूद्ध भविष्यद्वाणी करके कहा, तू ने अहज्याह से मिल लिया, इस कारण यहोवा ने तेरे कामोंको तोड़ दिया है, यहां तक ​​कि वे तर्शीश को न जा सके।

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