segunda-feira, 24 de março de 2025

द्वितीय इतिहास 24 योआश ने मन्दिर की मरम्मत का आदेश दिया

 द्वितीय इतिहास 24

योआश ने मन्दिर की मरम्मत का आदेश दिया

1 जब योआश राज्य करने लगा तब वह सात वर्ष का या, और यरूशलेम में चालीस वर्ष तक राज्य करता रहा; और यह उसकी माता सीबिया अर्थात बेर्शेबा का नाम था।

2 और यहोयादा याजक के जीवन भर योआश ने वही किया जो यहोवा की दृष्टि में ठीक था।

3 और यहोयादा ने दो स्त्रियां ब्याह लीं; और उससे बेटे और बेटियाँ उत्पन्न हुईं।

4 और इसके बाद ऐसा हुआ कि योआश के मन में यहोवा के भवन को नया बनाने की इच्छा उत्पन्न हुई।

5 तब उस ने याजकोंऔर लेवियोंको इकट्ठा करके उन से कहा, यहूदा के नगरोंमें जाकर सारे इस्राएल से प्रति वर्ष अपने परमेश्वर के भवन की मरम्मत के लिथे रूपया इकट्ठा किया करो; और तुम इस काम में जल्दी करो। परन्तु लेवियों ने जल्दबाजी न की।

6 और राजा ने प्रधान यहोयादा को बुलाकर उस से कहा, तू ने लेवियोंमें यह क्यों न पूछा, कि वे यहूदा और यरूशलेम से यहोवा के दास मूसा और इस्राएल की मण्डली की भेंट को साक्षीपत्र के तम्बू में ले आएं?

7 इसलिये कि अतल्याह दुष्ट थी, उसके पुत्रोंने परमेश्वर का भवन नाश किया, और यहोवा के भवन की सब पवित्र वस्तुएं भी उन्होंने बाल देवताओं के लिये उपयोग कीं।

8 और राजा ने आज्ञा दी, और उन्होंने एक सन्दूक बनाकर बाहर यहोवा के भवन के द्वार पर खड़ा किया।

9 और यहूदा और यरूशलेम में यह प्रचार किया गया, कि जो भेंट यहोवा के दास मूसा ने जंगल में इस्राएल को दी थी, उसे वे यहोवा के पास ले आएं।

10 तब सब हाकिम और सब प्रजा के लोग आनन्दित हुए, और भेंट ले आकर सन्दूक में तब तक डालते रहे, जब तक काम पूरा न हो गया।

11 और ऐसा हुआ कि जिस समय वे राजा की आज्ञा के अनुसार सन्दूक को लेवियोंके हाथ से ले आए, और यह देखकर कि उस में बहुत धन हो गया या, तब राजा के मुंशी और महायाजक के हाकिम ने आकर सन्दूक को खाली किया, और उसको लेकर उसके स्यान पर रख दिया; वे प्रति दिन ऐसा ही करते रहे, और बहुत सा धन इकट्ठा करते रहे।

12 जिसे राजा और यहोयादा ने यहोवा के भवन के काम करनेवालोंको दे दिया, और यहोवा के भवन की मरम्मत के लिथे राजमिस्त्रियोंऔर बढ़ईयोंको, और यहोवा के भवन की मरम्मत के लिथे लोहारोंऔर तालेवालोंको काम पर लगाया।

13 और जो काम के अधिकारी थे, उन्होंने अपने हाथ से काम की मरम्मत का काम बढ़ाया; और उन्होंने परमेश्वर के भवन को उसके मूल स्वरूप में लौटा दिया, और उसे दृढ़ किया।

14 और जब वे काम पूरा कर चुके, तब वे बचे हुए रूपके को राजा और यहोयादा के साम्हने ले आए, और उस से यहोवा के भवन के लिथे सेवा टहल और भेंट के पात्र, और सुगन्धद्रव्य, और सोने चान्दी के पात्र बनाए। और यहोयादा के जीवन भर यहोवा के भवन में निरन्तर होमबलि चढ़ाया करते रहे।

15 और यहोयादा बूढ़ा हो गया, और पूरा दिन मर गया; जब वह मरा, तब वह एक सौ तीस वर्ष का था।

16 और उन्होंने उसे दाऊदपुर में राजाओंके साय मिट्टी दी; क्योंकि उस ने इस्राएल में भलाई की थी। और भगवान और उसके घर की ओर.

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