quinta-feira, 27 de março de 2025

द्वितीय इतिहास 28 आहाज अश्शूर के राजाओं से सहायता माँगता है और उसे नहीं मिलती

 द्वितीय इतिहास 28

आहाज अश्शूर के राजाओं से सहायता माँगता है और उसे नहीं मिलती

16 उस समय राजा आहाज ने अश्शूर के राजाओं के पास कहला भेजा, कि वे मेरी सहायता करें।

17 फिर एदूमियों ने भी आकर यहूदा को मारा, और बन्धुओं को ले गए।

18 और पलिश्तियोंने मैदान के और यहूदा के दक्खिन देश के नगरोंपर अधिकार कर लिया, और बेतशेमेश और अय्यालोन और गदेरोत और सोचो को और अपने अधिकार के स्थानोंसमेत गिन्ज़ो को ले लिया, और वहां रहने लगे।

19 क्योंकि यहोवा ने इस्राएल के राजा आहाज के कारण यहूदा को नीचा कर दिया; क्योंकि उसने यहूदा को, जो पूरी तरह से यहोवा के विरुद्ध अपराध करने पर तुला था, भरमाया था।

20 और अश्शूर का राजा तिलगतपिलनेसेर उसके पास आया; परन्तु उस ने उसे बान्धा, और दृढ़ न किया।

21 क्योंकि आहाज ने यहोवा के भवन, राजभवन, और हाकिमों में से कुछ भाग लेकर अश्शूर के राजा को दे दिया; लेकिन इससे उसे कोई मदद नहीं मिली.

22 और जब उस ने उसे दबाया, तब उस ने यहोवा के विरूद्ध और भी अधिक अपराध किया, ऐसा राजा आहाज भी था।

23 क्योंकि उस ने दमिश्क के देवताओं को, जिन्होंने उसे मारा था, बलि चढ़ाया, और कहा, कि अराम के राजाओं के देवता उनकी सहाथता करते हैं, इसलिये मैं उनको बलि चढ़ाऊंगा, कि वे मेरी सहाथता करें। परन्तु वे उसका, और सारे इस्राएल का विनाश थे।

24 और आहाज ने यहोवा के भवन के पात्र इकट्ठे किए, और परमेश्वर के भवन के पात्रोंको तोड़ डाला, और यहोवा के भवन के द्वार बन्द कर दिए, और यरूशलेम के हर कोने में अपने लिये वेदियां बना लीं।

25 और यहूदा के हर एक नगर में उस ने पराये देवताओं के लिये धूप जलाने के लिये ऊंचे स्थान बनाए; इस प्रकार उस ने उनके पितरोंके परमेश्वर यहोवा को क्रोध दिलाया।

26 इसलिये उनकी और सब सफलताओं का, और पहिले से अन्त तक सब चालचलन का वर्णन यहूदा और इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखा है।

27 और आहाज अपने पुरखाओं के संग सो गया, और उन्होंने उसे यरूशलेम नगर में मिट्टी दी, परन्तु इस्राएल के राजाओं की कब्रों में न रखी; और उसका पुत्र हिजकिय्याह उसके स्थान पर राज्य करने लगा।

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