segunda-feira, 24 de março de 2025

द्वितीय इतिहास 24 योआश की मूर्तिपूजा

 द्वितीय इतिहास 24

योआश की मूर्तिपूजा

17 परन्तु यहोयादा के मरने के बाद यहूदा के हाकिम आकर राजा के साम्हने गिर पड़े; और राजा ने उनकी बात सुनी।

18 और वे यहोवा के भवन से चले गए; वे अपने पुरखाओं के परमेश्वर थे, और उन्होंने जंगल की मूरतोंऔर मूरतोंकी उपासना की; तब इस अपराध के कारण यहूदा और यरूशलेम पर बड़ा क्रोध भड़का।

19 परन्तु उस ने उनको प्रभु के पास लौटाने के लिये उनके बीच भविष्यद्वक्ता भेजे, और उन्होंने उनका विरोध किया, परन्तु उन्होंने न सुनी।

20 और परमेश्वर का आत्मा यहोयादा याजक के पुत्र जकरयाह पर उतरा, और उस ने लोगोंके ऊपर खड़ा होकर उन से कहा, परमेश्वर यों कहता है, तुम यहोवा की आज्ञाओं का उल्लंघन क्यों करते हो? इस कारण तुम उन्नति न करोगे; क्योंकि तू ने यहोवा को छोड़ दिया है, वह भी तुझे छोड़ देगा।

21 और उन्होंने उसके विरूद्ध राजद्रोह की गोष्ठी करके राजा की आज्ञा से यहोवा के भवन के आंगन में उस पर पथराव किया।

22 सो राजा योआश को अपके पिता यहोयादा की भलाई स्मरण न रही, वरन उसके पुत्र को घात किया, और उस ने मरते हुए कहा, यहोवा यह देखेगा, और बदला लेगा।

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