segunda-feira, 24 de março de 2025

द्वितीय इतिहास 23 याजक यहोयादा ने यहूदा के राजा के रूप में योआश का अभिषेक किया

 द्वितीय इतिहास 23

याजक यहोयादा ने यहूदा के राजा के रूप में योआश का अभिषेक किया

1 परन्तु सातवें वर्ष में यहोयादा ने परिश्रम किया, और यहोराम के पुत्र अजर्याह, योहानान के पुत्र इश्माएल, और ओबेद के पुत्र अजर्याह, अदलास के पुत्र मासेयाह, और शिकरी के पुत्र एलीशापात, अर्यात्‌ सैकड़ों प्रधानोंको संग ले लिया।

2 और उन्होंने यहूदा को घेर लिया, और यहूदा के सब नगरों से लेवियोंको और इस्राएल के पितरोंके मुख्य पुरूषोंको इकट्ठा किया, और यरूशलेम को आए।

3 और उस सारी मण्डली ने परमेश्वर के भवन के राजा के साय वाचा बान्धी; और यहोयादा ने उन से कहा, देखो, राजकुमार राज्य करेगा, जैसा यहोवा ने दाऊद की सन्तान के विषय कहा था।

4 तुम्हें यह करना होगा: तुम में से जो याजक और लेवीय सब्त के दिन प्रवेश करते हैं, उन में से एक तिहाई द्वारपाल होंगे;

5 और एक तिहाई भाग राजभवन में रहेगा; और दूसरा भाग नींव के द्वार पर; और सब लोग यहोवा के भवन के आंगन में होंगे।

6 परन्तु याजकोंऔर सेवा टहल करनेवालोंलेवियोंको छोड़ और कोई यहोवा के भवन में प्रवेश न करने पाए; ये प्रवेश करेंगे क्योंकि वे पवित्र हैं; परन्तु लोग यहोवा की रक्षा करते रहेंगे।

7 और लेवीय अपके अपके हाथ में हथियार लिये हुए राजा को चारों ओर से घेर लेंगे; और जो कोई घर में प्रवेश करेगा वह मर जाएगा; परन्तु जब राजा आए, और बाहर जाए, तब तू उसके संग रहेगा।

8 और लेवियोंऔर सब यहूदियोंने यहोयादा याजक की आज्ञा के अनुसार किया; और हर एक पुरूष ने अपने अपने पुरूष ले लिये, अर्यात्‌ जो विश्रामदिन को भीतर जाते थे, और जो विश्रामदिन को बाहर जाते थे; क्योंकि याजक यहोयादा ने वर्गों को ख़ारिज नहीं किया था।

9 और यहोयादा याजक ने शतप्रधानोंको वे भाले, ढालें, और अंगूठियां जो राजा दाऊद के थे, जो परमेश्वर के भवन में थीं दे दीं।

10 और उस ने सब लोगोंको अपके अपके हाथ में हथियार लिये हुए, भवन की दाहिनी ओर से बाईं ओर, वेदी और भवन की अलंग से लेकर राजा के चारों ओर खड़ा किया।

11 तब उन्होंने राजपुत्र को बाहर निकाला, और उस पर राजमुकुट रखा; उन्होंने उसकी गवाही दी, और उसे राजा बनाया: और यहोयादा और उसके पुत्रों ने उसका अभिषेक किया; और यहोयादा और उसके पुत्रों ने उसका अभिषेक किया, और कहा, राजा जीवित रहे!

12 जब अतल्याह ने राजा की स्तुति करने को दौड़ती हुई प्रजा का शब्द सुना, तब वे यहोवा के भवन में आए;

13 और उस ने दृष्टि की, और क्या देखा, कि राजा प्रवेश द्वार पर अपने खम्भे के पास खड़ा है, और हाकिम और नरसिंगे राजा के पास खड़े हैं; और उस देश के सब लोग आनन्दित हुए, और तुरहियां फूंकीं, और गायकों ने भी वाद्ययंत्र बजाया, और यह स्पष्ट किया कि उन्हें स्तुति गानी चाहिए: तब अटालिया ने अपने कपड़े फाड़ दिए, और चिल्लाया: राजद्रोह, राजद्रोह!

14 परन्तु याजक यहोयादा ने सेना के सिपाहियोंको बाहर लाकर उन से कहा, उसको पांति में से बाहर ले आओ, और जो कोई उसके पीछे हो वह तलवार से मार डाला जाएगा; क्योंकि याजक ने कहा था, तू उसे यहोवा के भवन में न मार डालना।

15 और उन्होंने उस पर हाथ डाला, और वह राजभवन के घोड़ाफाटक के द्वार पर गई; और वहाँ उन्होंने उसे मार डाला।

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