terça-feira, 25 de março de 2025

द्वितीय इतिहास 25 मूर्तिपूजा के कारण परमेश्वर ने अमस्याह को दण्ड दिया!

 द्वितीय इतिहास 25

मूर्तिपूजा के कारण परमेश्वर ने अमस्याह को दण्ड दिया!

14 और ऐसा हुआ, कि जब अमस्याह इदुमियोंको घात करके आया, तब उस ने सेईरियोंके देवताओं को अपके साथ ले आया, और उनको अपके देवताओं के लिथे ले लिया, और उनके साम्हने गिरकर उनके लिथे धूप जलाया।

15 तब यहोवा का क्रोध अमस्याह पर भड़का, और उस ने उसके पास एक भविष्यद्वक्ता भेजकर कहा, तू ने लोगोंके देवताओं की खोज क्योंकी है, जिन्हें उन्होंने तेरे हाथ से नहीं बचाया?

16 और ऐसा हुआ कि उस ने उस से बातें करके उस से कहा, क्या उन्होंने तुझे राजा का मन्त्री ठहराया है? चुप रहो, उन्होंने तुम्हें क्यों चोट पहुंचाई? तब भविष्यद्वक्ता रुका, और कहा, मैं देखता हूं, कि यहोवा ने पहले ही तुम्हें नष्ट करने का निश्चय कर लिया है; क्योंकि तू ने ऐसा किया, और मेरी सम्मति न मानी।

17 और जब यहूदा के राजा अमस्याह ने सम्मति की, तब उस ने यहोआहाज के पुत्र और येहू के पोता इस्राएल के राजा योआश के पास यह कहला भेजा, कि आ, हम एक दूसरे से भेंट करें।

18 परन्तु इस्राएल के राजा योआश ने यहूदा के राजा अमस्याह के पास कहला भेजा, कि लबानोन के देवदारू के पास एक थिसल ने कहला भेजा, कि अपनी बेटी मेरे बेटे को ब्याहने के लिये दे दे; परन्तु लबानोन के मैदान के पशु उधर से निकल गए, और ऊँटकटारे को रौंद डाला।

19 तू कहता है, देख, मैं ने इदूमियोंको जीत लिया है; और तेरा मन फूलकर बड़ा हुआ; इसलिये अब तुम अपने घर में ही रहो; तुम क्यों बुराई में उतरते हो, कि तुम और यहूदा तुम्हारे साथ गिरें?

20 परन्तु अमस्याह ने उसकी न सुनी, क्योंकि यह परमेश्वर की ओर से या, कि उनको शत्रुओंके वश में कर दे, इसलिये हुआ या, कि वे इदूमियोंके देवताओं की खोज करते थे।

21 तब इस्राएल के राजा योआश ने चढ़ाई की, और उस ने और यहूदा के राजा अमस्याह ने यहूदा के बेतशेमेश में एक दूसरे का साम्हना देखा।

22 और यहूदा इस्राएल से हार गया, और वे अपने अपने डेरे को लौट गए।

23 और इस्राएल के राजा योआज ने यहूदा के राजा अमस्याह को जो योआश का पोता और यहोआहाज का पोता या, बेतशेमेश में पकड़कर यरूशलेम को ले गया; और उस ने यरूशलेम की शहरपनाह को एप्रैम के फाटक से लेकर कोने के फाटक तक चार सौ हाथ ढा दिया।

24 और वह सब सोना, चान्दी, और जितने पात्र ओबेदेदोम के पास परमेश्वर के भवन में थे, और राजभवन के खजानोंको, और बन्धुओंको भी ले गया, और शोमरोन को लौट गया।

25 और यहूदा का राजा योआश का पुत्र अमस्याह इस्राएल के राजा यहोआहाज के पुत्र योआश के मरने के पश्चात् पन्द्रह वर्ष तक जीवित रहा।

26 अमस्याह की और सब सफलताएं, पहिली और अन्तिम, सब देखो, क्या यहूदा और इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखी हैं?

27 और जब से अमस्याह यहोवा से फिर गया, तब से यरूशलेम में उसके विरूद्ध राजद्रोह की गोष्ठी की गई, परन्तु वह लाकीश को भाग गया; परन्तु उन्होंने उसके पीछे लाकीश को भेजा, और उसे वहीं मार डाला।

28 और वे उसे घोड़ोंपर चढ़ाकर ले आए, और यहूदा के नगर में उसके पुरखाओंके साय मिट्टी दी।

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