द्वितीय इतिहास 07
भगवान दूसरी बार सुलैमान के सामने प्रकट हुए और उससे वादे किये
11 इस प्रकार सुलैमान ने यहोवा का भवन और राजभवन पूरा किया; और जो कुछ सुलैमान ने यहोवा के भवन और अपने भवन में करना चाहा, वह सब उस ने पूरा किया।
12 और यहोवा ने रात को सुलैमान को दर्शन देकर कहा, मैं ने तेरी प्रार्थना सुनी है, और मैं ने इस स्यान को यज्ञ का भवन बनाने के लिथे चुन लिया है।
13 यदि मैं आकाश को बन्द कर दूं, और वर्षा न हो; या टिड्डियों को भूमि निगलने का आदेश दे; या यदि मैं अपनी प्रजा में मरी फैलाऊं;
14 और यदि मेरी प्रजा के लोग जो मेरे कहलाते हैं, दीन होकर प्रार्थना करें, और मेरे दर्शन के खोजी होकर अपनी बुरी चाल से फिरें, तो मैं स्वर्ग में से सुनकर उनका पाप क्षमा करूंगा, और उनके देश को ज्यों का त्यों कर दूंगा।
15 अब मेरी आंखें खुली रहेंगी, और मेरे कान इस स्यान की प्रार्थना पर लगे रहेंगे।
16 क्योंकि अब मैं ने इस भवन को चुन लिया, और पवित्र किया है, कि मेरा नाम इस में सदा बना रहे; और मेरी आंखें और मेरा मन सदा इसी पर लगे रहें।
17 और यदि तुम अपके पिता दाऊद की नाईं मेरे साम्हने चलते हो, और जो कुछ मैं ने तुम्हें आज्ञा दी है उन सभों के अनुसार करते हो, और मेरी विधियों और नियमोंको मानते हो,
18 और मैं उस वाचा के अनुसार जो मैं ने तेरे पिता दाऊद से बान्धी या, कि तुझे इस्राएल पर प्रभुता करने के लिये एक पुरूष की घटी न होगी, तेरे राज्य की गद्दी को स्थिर करूंगा।
19 परन्तु यदि तुम पीछे हट जाओ, और मेरी विधियों और आज्ञाओं को जो मैं ने तुम्हारे साम्हने रखी है त्यागो, और जाकर पराये देवताओं की उपासना करो, और उनको दण्डवत् करो,
20 तब मैं उनको अपने देश में से जो मैं ने उन्हें दिया है उखाड़ डालूंगा, और इस भवन को जो मैं ने अपके नाम के लिथे पवित्र किया है, अपके साम्हने से दूर कर दूंगा, और सब जातियोंके बीच में इसको नीतिवचन और आदर्श वाक्य बनाऊंगा।
21 और इस भवन के विषय में जो इतना ऊंचा या, जो कोई इसके पास से चले वह चकित होकर कहेगा, यहोवा ने इस देश और इस भवन से ऐसा क्यों किया है?
22 और वे कहेंगे, उन्हों ने अपके पितरोंके परमेश्वर यहोवा को जो उन्हें मिस्र देश से निकाल लाया या, त्यागकर पराये देवताओं के अधीन हो गए, और उनको दण्डवत् करके उनकी उपासना करने लगे, इस कारण उस ने उन पर यह सब विपत्ति डाली।
Nenhum comentário:
Postar um comentário