द्वितीय इतिहास 01
सुलैमान की ताकतें और धन
13 तब सुलैमान गिबोन के पर्वत से, अर्थात् मिलापवाले तम्बू के साम्हने से यरूशलेम को आया, और इस्राएल पर राज्य करने लगा।
14 और सुलैमान ने रथ और सवार इकट्ठे किए, और उसके चौदह सौ रथ, और बारह हजार सवार हो गए; और उनको रथोंवाले नगरोंमें और यरूशलेम में राजा के पास ठहरा दिया।
15 और राजा ने यरूशलेम में पत्थरोंके समान सोना, चान्दी, और मैदानोंमें जंगली अंजीर के वृक्षोंके समान देवदार बहुतायत से बनवाए।
16 और सुलैमान के पास जो घोड़े थे, वे मिस्र से लाए गए थे, और सनी के धागे को राजा के व्यापारियों ने एक निश्चित कीमत पर ले लिया।
17 और वे एक एक रथ को छ: सौ शेकेल चान्दी में, और एक एक घोड़े को एक सौ पचास शेकेल में मिस्र से ले आते थे; और उनके द्वारा हित्तियोंके सब राजाओं और अराम के राजाओंके लिये घोड़े निकाले गए।
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