द्वितीय इतिहास 01
सुलैमान ने परमेश्वर से बुद्धि मांगी
7 उसी रात परमेश्वर ने सुलैमान को दर्शन देकर कहा, जो कुछ तू चाहता है कि मैं तुझे दूं, वह मांग।
8 और सुलैमान ने परमेश्वर से कहा, तू ने मेरे पिता दाऊद पर बड़ी कृपा की है, और मुझे उसके स्थान पर राजा बनाया है।
9 इसलिये अब, हे प्रभु यहोवा, तेरा वचन जो मेरे पिता दाऊद को दिया गया था, वह सत्य हो; क्योंकि तू ने मुझे पृय्वी की धूल के तुल्य अनगिनित प्रजा पर राजा बनाया है।
10 इसलिये अब मुझे बुद्धि और ज्ञान दे, कि मैं इन लोगोंके साम्हने आया-जाऊं; क्योंकि तुम्हारी इस महान प्रजा का न्याय कौन कर सकता है?
11 तब परमेश्वर ने सुलैमान से कहा, यह तो तेरे मन में या, और तू ने न तो धन, सम्पत्ति, न महिमा, और न अपने बैरियोंकी मृत्यु मांगी, और न बहुत दिन का जीवन मांगा, परन्तु तू ने बुद्धि और ज्ञान ही अपने लिथे मांगा है, कि तू मेरी प्रजा का न्याय कर सके, जिस पर मैं ने तुझे राजा ठहराया है,
12 बुद्धि और ज्ञान तुझे दिया गया है; और मैं तुझे धन, सम्पत्ति, और महिमा दूंगा, ऐसा तेरे पहिले कोई राजा न हुआ; और तेरे पीछे कोई राजा न होगा।
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