मैं राजा 22
यहोशापात का शासनकाल और उसकी मृत्यु
41 और इस्राएल के राजा अहाब के चौथे वर्ष में आसा का पुत्र यहोशापात यहूदा पर राज्य करने लगा।
42 और जब यहोशापात राज्य करने लगा, तब वह पैंतीस वर्ष का या; और पच्चीस वर्ष तक यरूशलेम में राज्य करता रहा; और उसकी माता का नाम अजूबा और सिल्की की बेटी थी।
43 और वह अपके पिता आसा की सी चाल चला, और जो यहोवा की दृष्टि में ठीक है वही करता रहा, और उन से अलग न हुआ।
44 तौभी ऊंचे स्थान न हटाए गए; लोग फिर भी ऊंचे स्थानों पर बलि चढ़ाते और धूप जलाते रहे।
45 और यहोशापात ने इस्राएल के राजा से मेल कर लिया।
46 यहोशापात के और काम और उसने जो पराक्रम दिखाया, और जिस प्रकार उसने युद्ध किया, यह सब क्या यहूदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखा है?
47 और उस ने उसके पिता आसा के दिनोंमें बचे हुए सब बदनाम जवानोंको भी देश से निकाल दिया।
48 तब एदोम में कोई राजा न था, केवल एक राजा था।
49 और यहोशापात ने सोना लेने के लिथे ओपीर को जाने के लिथे तर्शीश से जहाज बनवाए; परन्तु वे नहीं थे, क्योंकि एस्योनगेबेर में जहाज टूट गए।
50 तब अहाब के पुत्र अहज्याह ने यहोशापात से कहा, मेरे सेवक तेरे दासोंके साय जहाजोंपर चलते हैं। परन्तु यहोशापात ऐसा नहीं चाहता था।
51 और यहोशापात अपने पुरखाओं के संग सो गया, और उसे उसके पुरखाओं के बीच उसके मूलपुरुष दाऊद के नगर में मिट्टी दी गई; और उसका पुत्र यहोराम उसके स्थान पर राज्य करने लगा।
52 और यहूदा के राजा यहोशापात के सत्रहवें वर्ष में अहाब का पुत्र अहज्याह शोमरोन में राज्य करने लगा, और दो वर्ष तक इस्राएल पर राज्य करता रहा।
53 और उस ने यहोवा की दृष्टि में बुरा किया, और अपनी माता की सी चाल, और नबात के पुत्र यारोबाम की सी चाल चला, जिस ने इस्राएल से पाप कराया या।
54 और वह बाल की उपासना करने लगा, और उसे दण्डवत् करने लगा; और अपने पिता के सब कामों के अनुसार उस ने इस्राएल के परमेश्वर यहोवा को अप्रसन्न किया।
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