मैं राजा 16
ओमरी ने तिब्नी को हराया और शासन किया
21) तब इस्राएल के लोग दो दलों में विभाजित हो गये: आधे लोग गीनत के पुत्र तिब्नी को राजा बनाने के लिये उसके पीछे हो लिये और आधे लोग ओम्री के पीछे हो लिये।
22) परन्तु जो लोग ओम्री के पीछे चले, वे गीनत के पुत्र तिब्नी के पीछे चलने वालों से अधिक शक्तिशाली थे: और तिब्नी मर गया, और ओम्री राज्य करने लगा।
23 यहूदा के राजा आसा के इकतीसवें वर्ष में ओम्री इस्राएल पर राज्य करने लगा, और बारह वर्ष तक राज्य करता रहा: और छ: वर्ष तक तिर्सा में राज्य करता रहा।
24 और उस ने सामरिया के पहाड़ को दो किक्कार चान्दी में सेमेर से मोल लिया; और उस पहाड़ पर उसे बनाया, और सामरिया के पहाड़ के स्वामी सेमेर के नाम पर उस ने उस नगर का नाम रखा, जो उस ने बसाया था।
25 और ओम्री ने वह किया जो यहोवा की दृष्टि में बुरा जान पड़ा; और उस ने उन सब से भी बुरा काम किया जो उस से पहिले थे।
26 और वह नबात के पुत्र यारोबाम की सी चाल चला, और अपने व्यर्थ कामों से इस्राएल के परमेश्वर यहोवा को रिस दिलाकर पाप भी करता रहा।
27 और ओम्री की और सब सफलताएं, जो कुछ उस ने किया, और जो सामर्य उसने दिखाई, वह सब क्या इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखा है?
28 और ओम्री अपने पुरखाओं के संग सो गया, और उसे शोमरोन में मिट्टी दी गई: और उसका पुत्र अहाब उसके स्थान पर राज्य करने लगा।
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