quarta-feira, 11 de dezembro de 2024

मैं राजा 18 एलिय्याह अहाब के सामने प्रकट होता है

 मैं राजा 18

एलिय्याह अहाब के सामने प्रकट होता है


1 और बहुत दिन के बाद ऐसा हुआ, कि तीसरे वर्ष में यहोवा का यह वचन एलिय्याह के पास पहुंचा, कि जाकर अपने आप को अहाब को दिखा; क्योंकि मैं पृय्वी पर मेंह बरसाऊंगा।


2 और एलिय्याह अपने आप को अहाब को दिखाने को गया: और सामरिया में अकाल बहुत बढ़ गया।


3 और अहाब ने ओबद्याह को भण्डारी बुलाया: और ओबद्याह यहोवा का बहुत भय मानता था,


4 और जब ईज़ेबेल ने यहोवा के नबियोंको नाश किया, तब ओबद्याह ने सौ नबियोंको, और पचास-पचास करके ले लिया, और गुफा में छिपा रखा, और उन्हें रोटी और पानी खिलाता रहा।


5 और अहाब ने ओबद्याह से कहा, देश में जल के सब सोतोंऔर सब नदियोंके पास जाओ; कदाचित हम को घास मिले, जिस से हम घोड़ोंऔर खच्चरोंको जीवित रखें, और पशुओंसे वंचित न रहें।


6 और उन्होंने उस देश को आपस में बाँट लिया, कि उस में से होकर जाओ; अहाब तो एक मार्ग से चला, और ओबद्याह भी दूसरे मार्ग से चला।


7- ओबद्याह पहले ही अपने रास्ते पर था; देखो, एलिय्याह ने उसे पाया; और जब उस ने उसे पहचाना, तब मुंह के बल गिरकर कहा, क्या तू मेरा प्रभु एलिय्याह है?


8 और उस ने उस से कहा, मैं हूं: जाकर अपके प्रभु से कह, देख, तू एलिय्याह है।


9 और उस ने कहा, मैं ने क्या पाप किया है, कि तू ने अपके दास को अहाब के हाथ में कर दिया, कि वह मुझे मार डाले?


10 तेरे परमेश्वर यहोवा के जीवन की शपय, कोई जाति वा राज्य ऐसा न होगा जहां मेरे प्रभु ने तुझे ढूंढ़ने को न भेजा हो; और जब उन्होंने कहा, तू यहां नहीं है, तब राज्य राज्य और अन्यजातियोंको मैं ने शपथ खिलाई, कि यदि उन्होंने तुझे न पाया होता।


11 और अब तू कहता है, जाकर अपने स्वामी से कह, कि एलिय्याह यहां है।


12 और ऐसा हो सकता है, कि जब मैं तुम्हारे पास से चला जाऊंगा, तब यहोवा का आत्मा तुम्हें न जाने कहां ले जाएगा, और यदि मैं अहाब को समाचार सुनाऊं, और वह तुम्हें न पाए, तो वह मुझे मार डालेगा: परन्तु मैं, तेरा दास, बचपन से ही यहोवा का भय मानता आया हूं।


13 क्या उन्होंने मेरे प्रभु को नहीं बताया, कि जब ईजेबेल ने यहोवा के भविष्यद्वक्ताओं को घात किया, तब मैं ने क्या किया, और यहोवा के भविष्यद्वक्ताओं में से एक सौ पुरूषों को, पचास पचास करके गुफाओं में छिपा रखा, और उन्हें रोटी और पानी देकर खिलाया?


14 और अब तू कहता है, जाकर अपने स्वामी से कह, कि एलिय्याह यहां है, और वह मुझे मार डालना चाहता है।


15 और एलिय्याह ने कहा, सेनाओं के यहोवा के जीवन की शपय, जिसके साम्हने मैं खड़ा हूं, आज मैं अपने आप को उस पर प्रगट करूंगा।


16 तब ओबद्याह अहाब से मिलने को गया, और उस से कहा: और अहाब एलिय्याह से मिलने को गया।


17 और जब अहाब ने एलिय्याह को देखा, तब अहाब ने उस से कहा, क्या तू इस्राएल को उपद्रव करानेवाला है?


18 फिर उस ने कहा, मैं ने इस्राएल को नहीं, परन्तु तुझे और तेरे पिता के घराने को सताया है, क्योंकि तुम यहोवा की आज्ञाओं को त्यागकर बाल देवताओं के पीछे हो गए हो।


19 इसलिये अब सब इस्राएल को भेजकर कर्मेल पर्वत पर मेरे पास इकट्ठा करो; और बाल के साढ़े चार सौ भविष्यद्वक्ता, और अशेरा के चार सौ भविष्यद्वक्ता, जो ईज़ेबेल की मेज पर खाते थे।


20 तब अहाब ने सब इस्राएलियोंको बुलवा भेजा, और नबियोंको कर्म्मेल पर्वत पर इकट्ठा किया।


21 तब एलिय्याह सब लोगोंके पास आकर कहने लगा, तुम कब तक दो विचारोंके बीच झूलते रहोगे? यदि यहोवा परमेश्वर है, तो उसके पीछे हो लो, और यदि बाल है, तो उसके पीछे हो लो। परन्तु लोगों ने उसे कुछ उत्तर न दिया।

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