segunda-feira, 9 de dezembro de 2024

मैं राजा 17 सारपत की विधवा

 मैं राजा 17


सारपत की विधवा


8 तब यहोवा का यह वचन उसके पास पहुंचा,


9 और उठकर सारपत को जो सीदोन में है, जाकर वहीं रहना, मैं ने वहां एक विधवा स्त्री को तेरे पालन पोषण के लिथे आज्ञा दी है;


10 तब वह उठकर सेरेपत को गया; और जब वह नगर के फाटक पर पहुंचा, तो क्या देखा, कि एक विधवा स्त्री लकड़ी बीन रही है; और उस ने उसे बुलाया, और उस से कहा, मेरे पीने के लिये किसी बर्तन में थोड़ा पानी ले आ।


11 और जब वह उसे लेने गई, तो उस ने उसे बुलाया, और उस से कहा, अब अपके हाथ में रोटी का एक टुकड़ा मेरे लिये भी ले आ।


12 और उस ने कहा, तेरे परमेश्वर यहोवा के जीवन की शपथ, मेरे पास एक रोटी भी नहीं है, केवल कड़ाही में मुट्ठी भर मैदा, और कुप्पी में थोड़ा सा तेल है; और यहाँ देखो, मैंने दो चिप्स उठाए हैं, और मैं उन्हें अपने और अपने बेटे के लिए तैयार करने जा रहा हूँ, ताकि हम उन्हें खा सकें और मर जाएँ।


13 एलिय्याह ने उस से कहा, मत डर; जाओ, अपने वचन के अनुसार करो: परन्तु पहिले मेरे लिये एक छोटी रोटी बनाकर मेरे पास ले आओ; तब आप इसे अपने और अपने बेटे के लिए करेंगे।


14 क्योंकि इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यों कहता है, जिस दिन तक यहोवा पृय्वी पर मेंह न बरसाएगा, उस दिन तक न तो हांडी का आटा घटेगा, और न कुप्पी का तेल घटेगा।


15 और उस ने जाकर एलिय्याह के कहने के अनुसार किया, और वह और उसके घराने का लोग बहुत दिन तक खाते रहे।


16) यहोवा के उस वचन के अनुसार, जो उस ने एलिय्याह की सेवकाई के द्वारा कहा था, न तो कड़ाही में आटा ख़त्म हुआ और न ही कुप्पी में तेल ख़त्म हुआ।


17 और इन बातों के बाद ऐसा हुआ, कि उस स्त्री का पुत्र जो घर की स्वामिनी थी, बीमार पड़ गया: और उसका रोग यहां तक ​​बढ़ गया, कि उस में सांस न रही।


18 तब उस ने एलिय्याह से कहा, हे परमेश्वर के जन, मुझे तुझ से क्या काम? क्या तुम मेरे पास मेरे अधर्म का स्मरण कराने, और मेरे पुत्र को मार डालने के लिये आए हो?


19 और उस ने उस से कहा, अपना पुत्र मुझे दे दे, और उस ने उसे उसकी गोद से उठा लिया, और उस कोठरी में जहां वह रहता या, ले जाकर अपने बिछौने पर लिटा दिया।


20 और उस ने यहोवा की दोहाई देकर कहा, हे मेरे परमेश्वर यहोवा, क्या तू ने इस विधवा के बेटे को भी जिसके संग मैं रहता हूं घात करके दु:ख उठाया है?


21 तब उस ने लड़के को तीन बार नापा, और यहोवा की दोहाई देकर कहा, हे मेरे परमेश्वर यहोवा, मैं तुझ से बिनती करता हूं, कि इस लड़के का प्राण उस में फिर आ जाए।


22 और यहोवा ने एलिय्याह की आवाज सुनी; और लड़के का प्राण उसमें फिर समा गया, और वह जीवित हो गया।


23 और एलिय्याह ने बालक को कमरे से निकालकर घर में ले आया, और उसकी माता को सौंप दिया; और एलिय्याह ने कहा, देख, तेरा पुत्र जीवित है।


24 तब स्त्री ने एलिय्याह से कहा, इस से मैं जान गई कि तू परमेश्वर का जन है, और यहोवा का जो वचन तेरे मुंह में रहता है वह सच्चा है।

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