मैं राजा 18
एलिय्याह और बाल के भविष्यवक्ता
22 तब एलिय्याह ने लोगोंसे कहा, मैं तो केवल यहोवा का भविष्यद्वक्ता रह गया हूं, और बाल के भविष्यद्वक्ता तो साढ़े चार सौ पुरूष हैं।
23 और हमें दो बछड़े दो, और वे उन में से एक बछड़ा अपने लिये चुन लें, और उसके टुकड़े टुकड़े करके लकड़ी पर रख दें, परन्तु आग न लगाना, और मैं दूसरे बछड़े को तैयार करके लकड़ी पर रखूंगा। .लकड़ी, और मैं इसे आग नहीं लगाऊंगा.
24 फिर अपके परमेश्वर से प्रार्थना करना, और मैं यहोवा से प्रार्थना करूंगा: और जो आग से उत्तर देगा वही परमेश्वर होगा। और सब लोगों ने उत्तर देकर कहा, यह बात अच्छी है।
25 और एलिय्याह ने बाल के नबियों से कहा, पहिले बछड़ोंमें से एक चुनकर तैयार कर लो, क्योंकि तुम बहुत हो गए हो, और अपके परमेश्वर से प्रार्थना करना, और उस में आग न लगाना।
26 और उन्होंने वह बछड़ा जो उस ने उन को दिया या, ले कर तैयार किया; और वे भोर से दोपहर तक बाल का नाम पुकारते रहे, और कहते रहे, हाय! बाल, हमें उत्तर दो! परन्तु कोई शब्द न हुआ, और न कोई उत्तर देनेवाला हुआ; और वे बनाई हुई वेदी पर कूद पड़े,
27 और दोपहर को ऐसा हुआ कि एलिय्याह ने उनको ठट्ठों में उड़ाकर कहा, ऊंचे शब्द से चिल्लाओ, क्योंकि वह ईश्वर है; हो सकता है कि वह बात कर रहा हो, या उसे कुछ करना हो, या वह यात्रा करने का इरादा रखता हो; शायद वह सोये और जगे।
28 और वे ऊंचे शब्द से चिल्लाने लगे, और अपनी रीति के अनुसार अपने आप को छुरियों और भालों से यहां तक घायल करने लगे, कि वे अपने आप को लोहू बहाने लगे।
29 और ऐसा हुआ कि दोपहर हो गई, और अन्नबलि चढ़ाने तक वे भविष्यद्वाणी करते रहे; परन्तु कोई शब्द न सुना, न उत्तर, और न ध्यान दिया गया।
30 तब एलिय्याह ने सब लोगों से कहा, मेरे निकट आओ। और सब लोग उसके पास आये; और यहोवा की वेदी जो टूटी हुई थी उसकी मरम्मत की।
31 और एलिय्याह ने याकूब के गोत्रोंकी गिनती के अनुसार बारह पत्थर ले लिए, जिनके पास यहोवा का यह वचन पहुंचा, कि तेरा नाम इस्राएल होगा।
32 और उन पत्थरोंसे उस ने यहोवा के नाम की वेदी बनाई; फिर उस ने वेदी के चारोंओर दो नग मीटर चौड़ी एक खाई बनाई।
33 तब उस ने लकड़ी इकट्ठी की, और बछड़े को टुकड़े टुकड़े करके लकड़ी पर रख दिया;
34 और उस ने कहा, चार घड़े जल से भरकर होमबलि और लकड़ी पर उंडेल दो। और उस ने कहा, ऐसा दूसरी बार करो: और उन्होंने वैसा ही दूसरी बार किया। और उस ने कहा, तीसरी बार भी ऐसा ही करो: और उन्होंने तीसरी बार भी वैसा ही किया।
35 और जल वेदी के चारों ओर बहने लगा: और खाई भी जल से भर गई।
36 और जब अन्नबलि चढ़ाया गया, तब एलिय्याह भविष्यद्वक्ता ने आकर कहा, हे यहोवा, इब्राहीम, इसहाक और इस्राएल के परमेश्वर, आज प्रगट कर दे, कि इस्राएल में तू ही परमेश्वर है, और मैं मैं आपका सेवक हूँ, और मैंने ये सब काम आपके वचन के अनुसार किये हैं।
37- हे प्रभु, मुझे उत्तर दे, मुझे उत्तर दे, कि ये लोग जान लें कि हे प्रभु, तू ही परमेश्वर है, और तू ने उनके मन को फेर दिया है।
38 तब यहोवा की ओर से आग गिरी, और होमबलि को, और लकड़ी, और पत्थरों, और धूलि को भस्म कर दिया, और गड़हे में का जल भी सुखा डाला।
39 जब सब लोगों ने यह देखा, तो मुंह के बल गिर पड़े, और कहने लगे, केवल यहोवा ही परमेश्वर है! केवल भगवान ही भगवान हैं!
40 और एलिय्याह ने उन से कहा, बाल के नबियोंपर हाथ बढ़ाओ, ऐसा न हो कि उन में से कोई बच निकले। और उन्होंने उन पर हाथ डाला; और एलिय्याह उन्हें कीशोन नाले में ले गया, और वहां उन्हें मार डाला।
41 तब एलिय्याह ने अहाब से कहा, चढ़, खा और पी, क्योंकि भारी वर्षा का शब्द हो रहा है।
42 और अहाब खाने पीने को चला गया: परन्तु एलिय्याह कर्मेल की चोटी पर चढ़ गया, और भूमि पर गिरकर दण्डवत् किया, और अपना मुंह घुटनों के बीच किया।
43 और उस ने अपके दास से कहा, अब चढ़, और समुद्र की ओर देख। और वह ऊपर गया, और देखा, और कहा, कुछ भी नहीं है। फिर उस ने कहा, वहां सात बार लौट आओ।
44 और सातवीं बार ऐसा हुआ, कि उस ने कहा, देख, मनुष्य के हाथ के समान एक छोटा सा बादल समुद्र में से उठ रहा है। तब उस ने कहा, जाकर अहाब से कह, अपना रथ तैयार करके नीचे जा, ऐसा न हो कि मेंह तुझे घेर ले।
45 और ऐसा हुआ कि आकाश बादलों और आन्धियों से काला हो गया, और बड़ी वर्षा होने लगी; और अहाब रथ पर चढ़कर यिज्रेल को चला गया।
46 और यहोवा का हाथ एलिय्याह पर था, और उस ने अपनी कमर बान्ध ली, और यिज्रेल के प्रवेश तक अहाब के आगे आगे दौड़ा।
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