segunda-feira, 24 de fevereiro de 2025

मैं इतिहास 16 धन्यवाद ज्ञापन और डेविड के गीत

 मैं इतिहास 16

धन्यवाद ज्ञापन और डेविड के गीत

4 और उस ने लेवियोंमें से कुछ को यहोवा के सन्दूक के साम्हने सेवक करके नियुक्त किया; और इस्राएल के परमेश्वर यहोवा को स्मरण रखना, और स्तुति करना, और मनाना।

5 आसाप प्रधान था, और उसके बाद जकर्याह था; यीएल, शमीरामोत, यीएल, मत्तित्याह, एलीआब, बनायाह, ओबेदेदोम और यीएल, सारंगियां और वीणाएं बजाते थे; और आसाप झांझ बजाता हुआ सुना करता था;

6 और बनायाह और यहजीएल नाम याजक परमेश्वर की वाचा के सन्दूक के आगे आगे तुरहियां बजाते हुए चलते थे।

7 फिर उसी दिन दाऊद ने आसाप और उसके भाइयोंकी सेवा के लिथे यहोवा की स्तुति करने के लिथे पहिले यह भजन सुनाया:

8 यहोवा की स्तुति करो, उस से प्रार्थना करो, उसके काम लोगों में प्रगट करो।

9 उसके लिये गाओ, उसके लिये गाओ, उसके सब आश्चर्यकर्मोंके विषय में ध्यान से बोलो।

10 उसके पवित्र नाम की महिमा करो; जो प्रभु के खोजी हैं उनका मन आनन्दित हो।

11 यहोवा और उसकी शक्ति की खोज करो; लगातार उसके चेहरे की तलाश करो.

12 उसके आश्चर्यकर्मों, और आश्चर्यकर्मों, और उसके मुंह के निर्णयोंको स्मरण करो।

13 हे इस्राएल के वंश, हे उसके दासो, हे याकूब के पुत्र, हे उसके चुने हुओं!

14 वह हमारा परमेश्वर यहोवा है; उसके न्याय सारी पृय्वी पर हैं।

15 उसकी जो वाचा और वचन उस ने हजार पीढि़योंके लिथे ठहराया, उसे सर्वदा स्मरण रखो;

16 उस वाचा के विषय में जो उस ने इब्राहीम से बान्धी, और उस ने इसहाक से जो शपय खाई यी;

17 जिस को याकूब ने विधि के लिथे, और इस्राएल ने सदा की वाचा के लिथे पुष्ट किया,

18 और कहा, मैं कनान देश अर्यात् तेरे निज भाग में से तुझे दूंगा;

19 तुम गिनती में थोड़े, और थोड़े मनुष्य, और उस में परदेशी हो।

20 और वे एक जाति से दूसरी जाति में, और एक राज्य से दूसरे राज्य में फिरते रहे।

21 उस ने किसी को उन पर अन्धेर करने न दिया, और उनके निमित्त राजाओं को डांटकर कहा,

22 मेरे अभिषिक्त को मत छू, और मेरे भविष्यद्वक्ताओं की हानि न कर।

23 सारी पृय्वी पर यहोवा का भजन गाओ; दिन-ब-दिन उसके उद्धार की घोषणा करो।

24 जाति जाति में उसकी महिमा, और देश देश के लोगों में उसके आश्चर्यकर्मोंकी गिनती करो।

25 क्योंकि यहोवा महान, और स्तुति के योग्य, और सब देवताओं से भी अधिक भययोग्य है।

26 क्योंकि जाति जाति के सब देवता व्यर्थ हैं; परन्तु यहोवा ने आकाश बनाया।

27 उसके सम्मुख महिमा और वैभव, और उसके स्यान में बल और आनन्द हैं।

28 हे जाति जाति के कुलों, यहोवा को दो, यहोवा को महिमा और शक्ति दो।

29 यहोवा को उसके नाम की महिमा दो; उपहार लाओ, और उसके सामने आओ: उसकी पवित्रता की सुंदरता में प्रभु की आराधना करो।

30 उसके साम्हने थरथराओ, सारी पृय्वी थरथराओ; क्योंकि जगत ऐसा स्थापित किया जाएगा, कि वह कभी न हिलेगा।

31 आकाश आनन्दित हो, और पृय्वी आनन्दित हो; और जाति जाति में यह कहा जाए, यहोवा राज्य करता है।

32 समुद्र अपनी परिपूर्णता से गरज रहा है; खेत जो कुछ उस में है उस सब से आनन्द मनाए।

33 तब जंगल के वृझ यहोवा के साम्हने आनन्द करेंगे; क्योंकि वह पृथ्वी का न्याय करने को आता है।

34 यहोवा की स्तुति करो, क्योंकि वह भला है; क्योंकि उसकी करूणा सदा की है।

35 और कह, हे हमारे उद्धारकर्ता परमेश्वर हमारा उद्धार कर, और हम को इकट्ठा कर, और अन्यजातियोंके हाथ से छुड़ा; कि हम तेरे पवित्र नाम की स्तुति करें, और तेरी स्तुति से घमण्ड करें।

36 इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की स्तुति युग युग तक होती रहेगी। और सब लोगों ने कहा: आमीन! और उसने यहोवा की स्तुति की।

37 तब वह आसाप और उसके भाइयोंको लेकर यहोवा की वाचा के सन्दूक के साम्हने से वहां से चला गया, कि उस ने प्रति दिन की आज्ञा के अनुसार सन्दूक के साम्हने नित्य सेवा टहल की।

38 और ओबेदेदोम और उसके अड़सठ भाई, अर्थात यदूतून के पुत्र ओबेदेदोम और होसा को उस ने द्वारपाल होने की आज्ञा दी।

39 और सादोक याजक और उसके भाई याजक, यहोवा के निवास के साम्हने, गिबोन के ऊंचे स्यान पर,

40 और सवेरे और सांझ को नित्य होमबलिवेदी पर यहोवा के लिये होमबलि चढ़ाना; और यह उस सब के अनुसार जो उस व्यवस्था में लिखा है, जो यहोवा ने इस्राएल को दी है।

41 और उनके संग हेमान, और यदूतून, और उन में से जो अच्छे से अच्छे लोग थे, वे यहोवा की स्तुति करने के लिथे नियुक्त किए गए, क्योंकि उसकी करूणा सदा की है।

42 और उनके साय हेमान और यदूतून, और उनके सुनानेवालोंके लिथे तुरहियां, और झांझ, और परमेश्वर की ओर से बाजे थे; परन्तु यदूतून के पुत्र द्वार पर थे।

43 तब सब लोग अपने अपने घर को चले गए; और दाऊद अपने घर को आशीर्वाद देने के लिये लौट आया।

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