अय्यूब 42
अय्यूब ने परमेश्वर के सामने खुद को नम्र किया और उसे महिमा दी
1 तब अय्यूब ने यहोवा को उत्तर दिया,
2 मैं जानता हूँ कि तू सब कुछ कर सकता है, और तेरी कोई योजना रुक नहीं सकती।
3 तुम कहते हो, वह कौन है जो ज्ञान के बिना युक्ति को छिपाता है? इसीलिए मैंने वह बात कही जो मुझे समझ में नहीं आई; जो चीजें मेरे लिए अद्भुत थीं, और जिन्हें मैं समझ नहीं पाया।
4 इसलिये मेरी सुनो, मैं बोलूंगा; मैं आपसे पूछूंगा और आप मुझे सिखाएंगे।
5 मैं ने अपने कानों से सुना था, परन्तु अब मेरी आंखें तुझे देखती हैं।
6 इसलिये मैं अपने आप से घृणा करता हूँ, और धूल और राख में पश्चाताप करता हूँ।
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