domingo, 25 de maio de 2025

भजन 12 मनुष्य का मिथ्यात्व और परमेश्वर की सत्यता

 भजन 12

मनुष्य का मिथ्यात्व और परमेश्वर की सत्यता


1हे यहोवा, हम को बचा ले, क्योंकि मनुष्य मीठी बातें बोलते हैं; क्योंकि मनुष्यों में विश्वासयोग्य लोग थोड़े हैं।

2 सब लोग अपने पड़ोसी से झूठ बोलते हैं; वे चापलूसी भरे होठों और दोहरे हृदय से बोलते हैं।

3 यहोवा सब चापलूसी करने वाले होठों को और घमण्ड से बोलने वाली जीभ को काट डालेगा।

4 क्योंकि वे कहते हैं, कि हम अपनी जीभ से जयवन्त होंगे, हमारे होठ हमारे ही हैं, हमारा प्रभु कौन है?

5 यहोवा की यह वाणी है, कि अब मैं उठूंगा, क्योंकि दीन लोगों पर अन्धेर होता है, और दरिद्र लोग कराहते हैं; और मैं उन लोगों को बचाऊंगा जिनके लिये वे प्राण रखते हैं।

6 यहोवा के वचन शुद्ध वचन हैं, उस चाँदी के समान जो भट्ठी में मिट्टी पर परखकर सात बार निर्मल की गई हो।

7 हे यहोवा, तू उनकी रक्षा करेगा; इस पीढ़ी से आप उन्हें हमेशा के लिए बचाएंगे।

8 दुष्ट लोग चारों ओर घूमते हैं, और जब कि सबसे नीच मनुष्य महान हो जाते हैं।

Nenhum comentário:

Postar um comentário