भजन संहिता 34
दाऊद परमेश्वर की स्तुति करता है, जिसने उसकी प्रार्थनाओं का उत्तर दिया, और लोगों से उस पर भरोसा करने का आग्रह करता है
1 मैं हर समय यहोवा की स्तुति करूंगा; उसकी स्तुति निरन्तर मेरे मुख से होती रहेगी।
2 मेरा मन यहोवा पर घमण्ड करेगा; नम्र लोग सुनकर आनन्दित होंगे।
3 मेरे साथ यहोवा की स्तुति करो, और आओ हम मिलकर उसके नाम की स्तुति करें।
4 मैं यहोवा के पास गया, और उसने मुझे उत्तर दिया; उसने मुझे मेरे सब भय से छुड़ाया।
5 वे उसकी ओर देखते और चमकते थे, और उनके चेहरे लज्जित नहीं होते थे।
6 इस दीन जन ने पुकारा, और यहोवा ने उसकी सुन ली, और उसे उसके सब संकटों से छुड़ाया।
7 यहोवा का दूत उसके डरवैयों के चारों ओर छावनी करके उन्हें बचाता है।
8 परखकर देखो कि यहोवा भला है; धन्य है वह मनुष्य जो उस पर भरोसा करता है।
9 यहोवा महान परमेश्वर है, और वह महान परमेश्वर है। 9 हे यहोवा के पवित्र लोगो, उसका भय मानो, क्योंकि उसके डरवैयों को किसी बात की घटी नहीं होती।
10 जवान सिंहों को तो भूख ही लगती है, परन्तु यहोवा के खोजियों को किसी बात की घटी नहीं होती।
11 हे बालकों, आओ, मेरी सुनो; मैं तुम्हें यहोवा का भय मानना सिखाऊंगा।
12 वह कौन है जो जीवन की अभिलाषा करता है, और लम्बे दिन चाहता है, कि भलाई देखे?
13 अपनी जीभ को बुराई से, और अपने होठों को छल की बातें बोलने से रोके रखो।
14 बुराई से दूर रहो, और भलाई करो; मेल-मिलाप को ढूंढ़ो, और उसका पीछा करो।
15 यहोवा की आंखें धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उसके कान उनकी दोहाई की ओर लगे रहते हैं।
16 यहोवा दुष्टों के विमुख रहता है, कि उनका स्मरण पृथ्वी पर से मिटा डाले।
17 धर्मी दोहाई देते हैं, और यहोवा सुनता है, और उन्हें सब विपत्तियों से छुड़ाता है।
18 यहोवा टूटे मनवालों के समीप रहता है, और पिसे हुओं का उद्धार करता है।
19 धर्मी पर बहुत सी विपत्तियाँ पड़ती हैं, परन्तु यहोवा उसको उन सब से छुड़ाता है।
20 वह उसकी सब हड्डियों की रक्षा करता है, और उनमें से एक भी टूटी नहीं।
21 दुष्टों को बुराई मार डालेगी, और धर्मी से बैर रखनेवालों को दण्ड मिलेगा।
22 यहोवा अपने दासों के प्राणों को छुड़ाता है, और जो उस पर भरोसा रखते हैं, उन में से कोई दोषी न ठहरेगा।
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