domingo, 25 de maio de 2025

भजन 14 मनुष्य का भ्रष्टाचार; तुम्हारा उद्धार परमेश्वर से आता है

 भजन 14

मनुष्य का भ्रष्टाचार; तुम्हारा उद्धार परमेश्वर से आता है


1 मूर्ख ने अपने मन में कहा है, “कोई परमेश्‍वर नहीं है।” वे भ्रष्ट हो गये हैं, उन्होंने घृणित काम किये हैं; कोई भी ऐसा नहीं है जो अच्छा करता है।

2 यहोवा ने स्वर्ग से मनुष्यों पर दृष्टि की, कि देखे कि क्या कोई समझदार और परमेश्वर को खोजने वाला है?

3 वे सब के सब भटक गए हैं, वे सब मिलकर गन्दे हो गए हैं; कोई भी ऐसा नहीं जो अच्छा काम करता हो, एक भी नहीं।

4 क्या कुटिल लोग नहीं जानते, कि वे मेरी प्रजा को रोटी की नाईं खा जाते हैं? वे प्रभु को नहीं पुकारते।

5 वहाँ उन्हें बड़ा भय मिला; क्योंकि परमेश्वर धर्मी लोगों की पीढ़ी में रहता है।

6 तू दीन जनों की युक्ति को लज्जित करता है, क्योंकि यहोवा उनका शरणस्थान है।

7 ओह! काश, इस्राएल का उद्धार पहले ही सिय्योन से आ गया होता! जब यहोवा अपने लोगों को बन्दी बनाकर वापस ले आएगा, तो याकूब आनन्दित होगा और इस्राएल प्रसन्न होगा।

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