domingo, 25 de maio de 2025

भजन 11 परमेश्वर धर्मी को बचाता है और दुष्टों को दण्ड देता है

 भजन 11

परमेश्वर धर्मी को बचाता है और दुष्टों को दण्ड देता है


1 मैं यहोवा पर भरोसा रखता हूँ; फिर तुम मेरी आत्मा से कैसे कहते हो कि पक्षी की तरह अपने पहाड़ पर भाग जाओ?

2 क्योंकि देखो, दुष्ट लोग अपना धनुष चढ़ाते और अपना तीर डोरी पर चढ़ाते हैं, कि सीधे मनवालों पर छिपकर बाण चलाएँ।

3 अब तो नींवें मिट गई हैं, अब धर्मी लोग क्या कर सकते हैं?

4 यहोवा अपने पवित्र मन्दिर में है; यहोवा का सिंहासन स्वर्ग में है; उसकी आंखें देखती रहती हैं, और उसकी पलकें मनुष्य की सन्तान को परखती रहती हैं।

5 यहोवा धर्मियों को परखता है; परन्तु उसका मन दुष्टों से और उपद्रव से प्रीति रखनेवालों से घृणा करता है।

6 दुष्टों पर वह फन्दे, आग और गन्धक बरसाएगा, और प्रचण्ड आंधी चलाएगा; उनके कटोरे का भाग यही है।

7 क्योंकि यहोवा धर्मी और न्याय से प्रीति रखता है; उसका मुख सीधे लोगों की ओर है।

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