quinta-feira, 15 de maio de 2025

अय्यूब 25 बिलदाद का मानना ​​है कि मनुष्य बिना किसी अनुमान के परमेश्वर के सामने खुद को सही नहीं ठहरा सकता

 अय्यूब 25

बिलदाद का मानना ​​है कि मनुष्य बिना किसी अनुमान के परमेश्वर के सामने खुद को सही नहीं ठहरा सकता


1 तब शूही बिलदद ने उत्तर दिया,

2 प्रभुता और भय उसी में हैं; वह अपने ऊंचे स्थानों में शांति स्थापित करता है।

3 क्या उनकी सेनाओं की संख्या है? और किसके लिये उसका प्रकाश नहीं चमकता?

4 फिर मनुष्य परमेश्वर के निकट कैसे धर्मी हो सकता है? अथवा जो स्त्री से उत्पन्न हुआ है वह कैसे पवित्र हो सकता है?

5 देख, उसकी दृष्टि में चन्द्रमा भी चमकता नहीं, और तारे भी निर्मल नहीं हैं।

6 फिर मनुष्य जो कीड़ा है, और आदमी जो पशु है, उसकी तो बात ही क्या है!

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