sábado, 24 de maio de 2025

भजन 05 परमेश्वर दुष्टों से घृणा करता है और धर्मियों को आशीर्वाद देता है

 भजन 05

परमेश्वर दुष्टों से घृणा करता है और धर्मियों को आशीर्वाद देता है


1 हे यहोवा, मेरे वचनों पर कान लगा; मेरे ध्यान पर ध्यान दो।

2 हे मेरे राजा, हे मेरे परमेश्वर, मेरी दोहाई सुन, क्योंकि मैं तुझी से प्रार्थना करूंगा।

3 हे यहोवा, भोर को मेरी वाणी तुझे सुनाई देगी; सुबह मैं तुम्हारे सामने उपस्थित होऊंगा और देखूंगा।

4 क्योंकि तू ऐसा परमेश्वर नहीं जो दुष्टता से प्रसन्न हो, और न बुराई तेरे साथ रहती है।

5 मूर्ख तेरे सम्मुख खड़े न होंगे; तू उन सब से घृणा करता है जो बुरा करते हैं।

6 तू झूठ बोलनेवालों को नाश करेगा; यहोवा खूनी और धोखेबाज़ मनुष्य से घृणा करेगा।

7 परन्तु मैं तेरी बड़ी करूणा के कारण तेरे घर में आऊंगा। और तेरे भय से मैं तेरे पवित्र मन्दिर की ओर झुकूंगा।

8 हे यहोवा, मेरे शत्रुओं के कारण मुझे अपने धर्म के मार्ग पर ले चल; मेरे सामने अपना मार्ग सीधा करो।

9 क्योंकि उनके मुँह से धर्म की बातें नहीं निकलतीं; उनकी अंतड़ियाँ सच्ची बुराइयाँ हैं, उनका गला खुली कब्र है; अपनी जीभ से चापलूसी करते हैं।

10 हे परमेश्वर, उनको दोषी ठहरा; अपनी ही सलाह से गिर जाते हैं; उनके बहुत से अपराधों के कारण उन्हें निकाल दे, क्योंकि उन्होंने तेरे विरुद्ध बलवा किया है।

11 परन्तु जितने तुझ पर भरोसा रखते हैं वे सब आनन्दित हों; वे सदा आनन्दित रहें, क्योंकि तू उनकी रक्षा करता है; और जो तेरे नाम से प्रेम रखते हैं वे तुझ में महिमा करें।

12 क्योंकि हे यहोवा, तू धर्मियों को आशीष देगा; तू उसे अपनी कृपादृष्टि से ढाल की तरह घेर लेगा।

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