भजन 01
धर्मी की खुशी और दुष्टों की सजा
1 धन्य है वह मनुष्य जो दुष्टों की युक्ति पर नहीं चलता, न पापियों के मार्ग में खड़ा होता, न ठट्ठा करनेवालों की मण्डली में बैठता है।
2 परन्तु वह तो यहोवा की व्यवस्था से प्रसन्न रहता है, और उसकी व्यवस्था पर रात दिन ध्यान करता रहता है।
3 क्योंकि वह उस वृक्ष के समान है, जो बहती नालियों के किनारे लगाया गया है, और अपनी ऋतु पर फलता है; उसके पत्ते कभी मुरझाएंगे नहीं, और जो कुछ वह पुरूष करे वह सफल होगा।
4 दुष्ट लोग ऐसे नहीं होते, वे भूसी के समान होते हैं, जिसे पवन उड़ा देता है।
5 इसलिये दुष्ट लोग न्याय में खड़े न रह सकेंगे, और न पापी धर्मियों की मण्डली में खड़े रह सकेंगे।
6 क्योंकि यहोवा धर्मियों का मार्ग जानता है; परन्तु दुष्टों का मार्ग नष्ट हो जाएगा।
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