quarta-feira, 11 de junho de 2025

भजन संहिता 75 भविष्यवक्ता परमेश्वर की स्तुति करता है और न्याय लागू करने का वादा करता है

 भजन संहिता 75

भविष्यवक्ता परमेश्वर की स्तुति करता है और न्याय लागू करने का वादा करता है


1 हे परमेश्वर, हम तेरी महिमा करते हैं, तेरा धन्यवाद करते हैं, क्योंकि तेरा नाम निकट है; तेरे आश्चर्यकर्मों का वर्णन है।

2 जब मैं नियत स्थान पर आऊंगा, तब धर्म से न्याय करूंगा।

3 पृथ्वी और उसके सभी निवासी नष्ट हो गए हैं, परन्तु मैंने उसके खंभों को दृढ़ किया है।

4 मैंने मूर्खों से कहा, “मूर्ख मत बनो”; और दुष्टों से कहा, “अपने सींग मत उठाओ।”

5 अपने सींगों को घमण्ड से मत उठाओ, और न ही कठोर गर्दन से बोलो।

6 क्योंकि न तो पूर्व से, न पश्चिम से, न ही रेगिस्तान से, कोई महिमा आती है।

7 परन्तु परमेश्वर न्यायी है; वह एक को गिराता है और दूसरे को बढ़ाता है।

8 क्योंकि यहोवा के हाथ में एक कटोरा है जिसका दाखमधु उबलता है, और मिश्रण से भरा हुआ है, और वह उसमें से उंडेलता है; निश्चय ही पृथ्वी के सभी दुष्ट लोग अपना गोबर निगलकर पी जाएँगे।

9 परन्तु मैं तो सदा घोषणा करता रहूँगा; मैं याकूब के परमेश्वर का भजन गाऊँगा।

10 और मैं दुष्टों के सब सींग तोड़ दूँगा, परन्तु धर्मियों के सींग ऊँचे किए जाएँगे।

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