sábado, 21 de junho de 2025

भजन 91 परमेश्वर में शरण लेने वालों की सुरक्षा

 भजन 91

परमेश्वर में शरण लेने वालों की सुरक्षा


1 जो परमप्रधान के गुप्त स्थान में रहता है, वह सर्वशक्तिमान की छाया में निवास करेगा।

2 मैं यहोवा के विषय में कहूंगा, “वह मेरा शरणस्थान और गढ़ है, मेरा परमेश्वर; मैं उस पर भरोसा रखूंगा।”

3 क्योंकि वह तुम्हें बहेलिये के जाल से और घातक महामारी से बचाएगा।

4 वह तुम्हें अपने पंखों की आड़ में ले लेगा, और तुम उसके पंखों के नीचे शरण पाओगे। उसकी सच्चाई तुम्हारी ढाल और कवच है।

5 तुम रात के भय से नहीं डरोगे, न ही दिन में उड़ने वाले तीर से,

6 न ही अंधेरे में चलने वाली महामारी से, न ही दोपहर में विनाश करने वाली तबाही से।

7 तुम्हारे पास एक हजार और तुम्हारे दाहिने हाथ पर दस हजार गिर सकते हैं, लेकिन यह तुम्हारे पास नहीं आएगा।

8 केवल अपनी आँखों से तुम देखोगे और दुष्टों का प्रतिफल देखोगे।

9 क्योंकि हे यहोवा, तू मेरा शरणस्थान है; परमप्रधान तेरा निवासस्थान है। 

10 कोई विपत्ति तुझ पर न पड़ेगी, न कोई दु:ख तेरे डेरे के निकट आएगा।

11 क्योंकि वह अपने दूतों को तेरे निमित्त आज्ञा देगा, कि वे तेरे सब मार्गों में तेरी रक्षा करें।

12 वे तुझे हाथों हाथ उठा लेंगे, ऐसा न हो कि तेरे पांवों में पत्थर से ठेस लगे।

13 तू सिंह और नाग को रौंदेगा; जवान सिंह और सर्प को तू पैरों तले रौंदेगा।

14 उसने मुझ से प्रेम किया है, इसलिये मैं उसको छुड़ाऊंगा; मैं उसको ऊंचे स्थान पर रखूंगा, क्योंकि उसने मेरे नाम को जान लिया है।

15 वह मुझे पुकारेगा, और मैं उसको उत्तर दूंगा; संकट में मैं उसके संग रहूंगा; मैं उसको छुड़ाऊंगा और उसका आदर करूंगा।

16 मैं उसको दीर्घायु से तृप्त करूंगा, और अपना उद्धार दिखाऊंगा।

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