domingo, 29 de junho de 2025

भजन संहिता 113 परमेश्वर की महानता और गरीबों के प्रति उसकी भलाई के लिए उसकी स्तुति करने का एक उपदेश

 भजन संहिता 113

परमेश्वर की महानता और गरीबों के प्रति उसकी भलाई के लिए उसकी स्तुति करने का एक उपदेश


1 यहोवा की स्तुति करो। हे यहोवा के सेवकों, यहोवा के नाम की स्तुति करो।

2 यहोवा का नाम अब से लेकर सदा तक धन्य है।

3 उदयाचल से लेकर अस्त होने तक यहोवा के नाम की स्तुति होती रहे।

4 यहोवा सब जातियों से महान है, और उसकी महिमा स्वर्ग से भी ऊपर है।

5 हमारे परमेश्वर यहोवा के तुल्य कौन है, जो ऊंचे पर विराजमान है;

6 जो आकाश और पृथ्वी में जो कुछ है, उसे देखने के लिए झुकता है;

7 जो दीन को धूल से उठाता है, और दरिद्र को राख के ढेर से ऊपर उठाता है,

8 कि उन्हें हाकिमों के संग, अर्थात् अपने लोगों के हाकिमों के संग बैठाए;

9 कौन बांझ को घर में बसाता है, और उसे बच्चों की आनन्दित माता बनाता है? प्रभु की स्तुति।

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