domingo, 8 de junho de 2025

भजन 56 दाऊद अपने शत्रुओं से बचाने के लिए परमेश्वर से प्रार्थना करता है, और उसे भरोसा है कि वह उसे अवश्य देगा

 भजन 56

दाऊद अपने शत्रुओं से बचाने के लिए परमेश्वर से प्रार्थना करता है, और उसे भरोसा है कि वह उसे अवश्य देगा


1 हे परमेश्वर, मुझ पर दया कर, क्योंकि मनुष्य मुझे निगलने का प्रयत्न करता है; वह दिन भर लड़ता हुआ मुझ पर अत्याचार करता है।

2 मेरे शत्रु दिन भर मुझे निगलने का प्रयत्न करते हैं; क्योंकि हे परमप्रधान, मेरे विरुद्ध लड़नेवाले बहुत हैं।

3 जब मैं डर जाऊँगा, तब मैं तुझ पर भरोसा रखूँगा।

4 परमेश्वर में मैं उसके वचन की स्तुति करूँगा; परमेश्वर पर मैंने अपना भरोसा रखा है; मैं नहीं डरूँगा। मनुष्य मेरा क्या कर सकता है?

5 दिन भर वे मेरे वचनों को तोड़-मरोड़कर पेश करते हैं; उनके सारे विचार मेरे विरुद्ध बुराई के लिए हैं।

6 वे इकट्ठे होते हैं, वे छिपते हैं, वे मेरे कदमों की निगरानी करते हैं, मानो वे मेरी मृत्यु की प्रतीक्षा कर रहे हों।

7 क्या वे अपने अधर्म के बीच से बच सकते हैं? हे परमेश्वर, अपने क्रोध में राष्ट्रों को नष्ट कर दे!

8 तूने मेरे भटकने का हिसाब रखा है; मेरे आँसुओं को अपनी कुप्पी में रख ले; क्या वे तेरी पुस्तक में नहीं हैं?

9 जब मैं तेरी दोहाई दूंगा, तब मेरे शत्रु पीछे हट जाएंगे; यह मैं जानता हूं, क्योंकि परमेश्वर मेरे साथ है।

10 परमेश्वर में मैं उसके वचन की प्रशंसा करूंगा; यहोवा में मैं उसके वचन की प्रशंसा करूंगा।

11 परमेश्वर में मैंने अपना भरोसा रखा है; मैं इस बात से नहीं डरूंगा कि मनुष्य मेरा क्या कर सकता है।

12 हे परमेश्वर, तेरी मन्नतें मुझ पर बनी हुई हैं; मैं तेरा धन्यवाद करूंगा;

13 क्योंकि तू ने मेरे प्राण को मृत्यु से, और मेरे पांव को गिरने से बचाया है, कि मैं परमेश्वर के साम्हने जीवतों की ज्योति में चलूं।

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