भजन 56
दाऊद अपने शत्रुओं से बचाने के लिए परमेश्वर से प्रार्थना करता है, और उसे भरोसा है कि वह उसे अवश्य देगा
1 हे परमेश्वर, मुझ पर दया कर, क्योंकि मनुष्य मुझे निगलने का प्रयत्न करता है; वह दिन भर लड़ता हुआ मुझ पर अत्याचार करता है।
2 मेरे शत्रु दिन भर मुझे निगलने का प्रयत्न करते हैं; क्योंकि हे परमप्रधान, मेरे विरुद्ध लड़नेवाले बहुत हैं।
3 जब मैं डर जाऊँगा, तब मैं तुझ पर भरोसा रखूँगा।
4 परमेश्वर में मैं उसके वचन की स्तुति करूँगा; परमेश्वर पर मैंने अपना भरोसा रखा है; मैं नहीं डरूँगा। मनुष्य मेरा क्या कर सकता है?
5 दिन भर वे मेरे वचनों को तोड़-मरोड़कर पेश करते हैं; उनके सारे विचार मेरे विरुद्ध बुराई के लिए हैं।
6 वे इकट्ठे होते हैं, वे छिपते हैं, वे मेरे कदमों की निगरानी करते हैं, मानो वे मेरी मृत्यु की प्रतीक्षा कर रहे हों।
7 क्या वे अपने अधर्म के बीच से बच सकते हैं? हे परमेश्वर, अपने क्रोध में राष्ट्रों को नष्ट कर दे!
8 तूने मेरे भटकने का हिसाब रखा है; मेरे आँसुओं को अपनी कुप्पी में रख ले; क्या वे तेरी पुस्तक में नहीं हैं?
9 जब मैं तेरी दोहाई दूंगा, तब मेरे शत्रु पीछे हट जाएंगे; यह मैं जानता हूं, क्योंकि परमेश्वर मेरे साथ है।
10 परमेश्वर में मैं उसके वचन की प्रशंसा करूंगा; यहोवा में मैं उसके वचन की प्रशंसा करूंगा।
11 परमेश्वर में मैंने अपना भरोसा रखा है; मैं इस बात से नहीं डरूंगा कि मनुष्य मेरा क्या कर सकता है।
12 हे परमेश्वर, तेरी मन्नतें मुझ पर बनी हुई हैं; मैं तेरा धन्यवाद करूंगा;
13 क्योंकि तू ने मेरे प्राण को मृत्यु से, और मेरे पांव को गिरने से बचाया है, कि मैं परमेश्वर के साम्हने जीवतों की ज्योति में चलूं।
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