द्वितीय इतिहास 34
हुल्दा, भविष्यवक्ता, यरूशलेम के विनाश की भविष्यवाणी करती है
22 तब हिल्किय्याह और राजा के दूत हुल्दा भविष्यद्वक्ता के पास गए, जो तोकात के पुत्र और हर्षा के पोता शल्लूम की स्त्री और वस्त्रों का रखवाला था (और वह यरूशलेम के दूसरे भाग में रहती थी); और उन्होंने उस से इस आशय की बातें कीं।
23 और उस ने उन से कहा, इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यों कहता है, जिस पुरूष ने तुम को मेरे पास भेजा है, उस से यह कहो:
24 यहोवा यों कहता है, देख, मैं इस स्यान और इसके निवासियोंपर विपत्ति डालूंगा, अर्यात् जितने शाप उस पुस्तक में लिखे हैं, जो यहूदा के राजा के साम्हने पढ़ी गई हैं।
25 क्योंकि उन्होंने मुझे त्यागकर पराये देवताओं के साम्हने धूप जलाया, और अपनी सब बनाई हुई वस्तुओं के द्वारा मुझे रिस दिलाई; इस कारण मेरा क्रोध इस स्थान पर भड़का है, और वह शान्त न होगा।
26 परन्तु यहूदा का राजा, जिस ने तुझे यहोवा से पूछने को भेजा है, उस से यह कहना, कि जो बातें तू ने सुनी हैं उनके विषय में इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यों कहता है,
27 और जब तू ने इस स्यान और इस के निवासियोंके विरूद्ध परमेश्वर की बातें सुनीं, तब तेरा मन नरम हो गया, और तू मेरे साम्हने दीन हुआ, और अपके वस्त्र फाड़कर मेरे साम्हने रोया, वैसे ही मैं ने तेरी सुन ली है, यहोवा की यही वाणी है।
28 सुनो, मैं तुम को तुम्हारे पुरखाओं के पास इकट्ठा करूंगा, और तुम शान्ति से अपनी कब्र में पहुंचाए जाओगे, और जो विपत्ति मैं इस स्यान पर और इसके निवासियों पर डालूंगा, उसे तुम अपनी आंखों से न देखोगे। और वे राजा को यह उत्तर देकर लौट आए।
29 तब राजा ने यहूदा और यरूशलेम के सब पुरनियोंको बुलवाकर इकट्ठा किया।
30 और राजा यहूदा के सब पुरूषों, और यरूशलेम के निवासियों, और याजकों, और लेवियों, और बड़े से छोटे तक सब लोगों समेत यहोवा के भवन को गया; और उस ने वाचा की पुस्तक के सब वचन जो यहोवा के भवन में पाए गए थे, उनको सुना दिया।
31 और राजा ने अपके स्यान पर खड़े होकर यहोवा के साम्हने यह वाचा बान्धी, कि वह यहोवा के पीछे चलेगा, और अपके सारे मन और अपके सारे प्राण से उसकी आज्ञाएं, चितौनियों, और विधियोंका पालन करेगा, और उस वाचा के वचनोंके अनुसार जो उस पुस्तक में लिखी हैं, करेगा।
32 और उस ने यरूशलेम और बिन्यामीन के सब लोगोंको खड़ा किया; और यरूशलेम के निवासियों ने अपने पितरोंके परमेश्वर परमेश्वर की वाचा के अनुसार किया।
33 और योशिय्याह ने इस्राएलियोंके सब देशोंमें से सब घृणित वस्तुएं दूर कीं; और उसने इस्राएल के सब लोगों को ऐसी ही उपासना करने के लिये विवश किया; वे जीवन भर अपने पितरों के परमेश्वर यहोवा के पीछे चलने से न फिरे।
Nenhum comentário:
Postar um comentário