एस्तेर 01
रानी वशती ने भोज में शामिल होने से इंकार कर दिया
10 सातवें दिन जब राजा का मन मदिरा के नशे में धुत्त था, तब उसने महूमान, बिजता, हर्बोना, बिगतान, अबगता, जेतेर और कर्कस नाम सात खोजों को, जो राजा क्षयर्ष के सम्मुख सेवा करते थे, आज्ञा दी,
11 वे रानी वशती को राजमुकुट पहनाकर राजा के सामने ले आएं, और लोगों और हाकिमों को उसकी सुन्दरता दिखाएं, क्योंकि वह देखने में सुन्दर थी।
12 परन्तु रानी वशती ने खोजों के द्वारा राजा की आज्ञा पाकर आने से इनकार कर दिया; इस कारण राजा बहुत क्रोधित हुआ, और उसका क्रोध भीतर ही भीतर भड़क उठा।
13 तब राजा ने समय को जानने वाले बुद्धिमान पुरुषों से पूछा (क्योंकि राजा का काम उन सब के साम्हने जो व्यवस्था और न्याय को जानते थे, इसी रीति से चलाया जाता था;
14 और जो उसके सबसे निकट थे, वे ये थे: कर्शना, शेतार, अदमाता, तर्शीश, मेरेस, मर्सेना, ममूकान, अर्थात् फारसियों और मादियों के सातों प्रधान, जो राजा का दर्शन पाते थे और राज्य में मुख्य पद पर बैठते थे।)
15 रानी वशती के साथ क्या किया जाना चाहिए था, क्योंकि उसने राजा क्षयर्ष की आज्ञा उसके खोजों के द्वारा नहीं मानी थी?
16 तब ममूकान ने राजा और हाकिमों के सामने कहा, “रानी वशती ने न केवल राजा के विरुद्ध पाप किया है, वरन् राजा क्षयर्ष के सब प्रान्तों के सब हाकिमों और सब लोगों के विरुद्ध भी पाप किया है।”
17 क्योंकि रानी के इस काम का समाचार सब स्त्रियों में फैल जाएगा, और वे अपने अपने पतियों को तुच्छ समझने लगेंगी; जब यह कहा जाएगा, कि राजा क्षयर्ष ने रानी वशती को अपने साम्हने लाने की आज्ञा दी थी, परन्तु वह न आई।
18 और उसी दिन फारस और मादै की राजकुमारियाँ रानी की इस बात को सुनकर राजा के सब हाकिमों से ऐसा ही कहेंगी; और इसलिए वहां पर्याप्त अवमानना और आक्रोश होगा।
19 यदि राजा को स्वीकार हो तो वह एक राजकीय आज्ञा निकाले, और उसे फारसियों और मादियों के कानून में लिख दे, और उसकी टाल-मटोल न की जाए, जिस से वशती राजा क्षयर्ष के साम्हने फिर न आने पाए; और राजा उसका राज्य उसके उस मित्र को दे सकता है जो उससे अच्छा हो।
20 और जब राजा की यह आज्ञा सारे राज्य में सुनाई जाएगी, तो बड़ी से लेकर छोटी तक सब स्त्रियां अपने अपने पति का आदर करेंगी।
21 ये बातें राजा और हाकिमों को अच्छी लगीं। और राजा ने ममूकान की बात के अनुसार किया।
22 तब उसने राजा के सब प्रान्तों में, अर्थात एक एक प्रान्त के अक्षरों में और एक एक जाति के लोगों की भाषा में इस आशय की चिट्ठियाँ भेजीं, कि हर एक मनुष्य अपने अपने घर में स्वामी हो। और यह बात सब लोगों में उनकी भाषा में प्रकाशित की जाए।
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