sexta-feira, 13 de junho de 2025

भजन 79 यरूशलेम का उजाड़ और सहायता के लिए प्रार्थना

 भजन 79

यरूशलेम का उजाड़ और सहायता के लिए प्रार्थना


1 हे परमेश्वर, राष्ट्र तेरी विरासत में घुस आए हैं; उन्होंने तेरे पवित्र मंदिर को अपवित्र कर दिया है; उन्होंने यरूशलेम को मलबे के ढेर में बदल दिया है।

2 उन्होंने तेरे सेवकों की लाशों को आकाश के पक्षियों को और तेरे संतों के मांस को पृथ्वी के जानवरों को खिला दिया है।

3 उन्होंने यरूशलेम के चारों ओर अपना खून पानी की तरह बहा दिया है, और उन्हें दफनाने वाला कोई नहीं है।

4 हम अपने पड़ोसियों के लिए अपमान का कारण बन गए हैं, हमारे आस-पास के लोगों के लिए एक उपहास और एक उपहास।

5 हे प्रभु, कब तक? क्या तू हमेशा क्रोधित रहेगा? क्या तेरी जलन आग की तरह जलती रहेगी?

6 उन राष्ट्रों पर अपना क्रोध उंडेल जो तुझे नहीं जानते, उन राज्यों पर जो तेरा नाम नहीं लेते।

7 क्योंकि उन्होंने याकूब को निगल लिया है और उसके घरों को उजाड़ दिया है।

 8 हमारे पिछले अधर्मों को याद मत करो; तेरी दया शीघ्र आ जाए और हम पर पूर्व से कृपा कर, क्योंकि हम बहुत दीन हो गए हैं।

 9 हे हमारे उद्धार करनेवाले परमेश्वर, अपने नाम की महिमा के निमित्त हमारी सहायता कर, और अपने नाम के निमित्त हमें छुड़ा, और हमारे पापों को क्षमा कर। 

10 जाति-जाति के लोग क्यों कहें, कि उनका परमेश्वर कहां है? तेरे दासों के लोहू का पलटा हमारी दृष्टि में जाति-जाति में प्रगट हो।

 11 बन्दियों का कराहना तेरे साम्हने पहुंचे; अपने भुजबल के बल के अनुसार प्राणदण्ड के योग्य ठहराए हुओं को बचा। 

12 और हे यहोवा, हमारे पड़ोसियों ने जो तेरी निन्दा की है, उसका सातगुणा दोष उनके सीने पर डाल दे। 

13 इस रीति से हम तेरी प्रजा और तेरी चरागाह की भेड़ें सदा तेरा धन्यवाद करते रहेंगे; पीढ़ी-दर-पीढ़ी हम तेरा गुणगान करते रहेंगे।

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