भजन संहिता 71
दाऊद परमेश्वर पर भरोसा करता है, और उससे प्रार्थना करता है कि वह उसे उसके शत्रुओं से छुड़ाए, और उसकी रक्षा करे
1 हे यहोवा, मैं तुझ पर भरोसा करता हूँ; मुझे कभी लज्जित न होने दे।
2 अपनी धार्मिकता में मुझे छुड़ा, और मुझे छुड़ा; अपना कान मेरी ओर लगा, और मुझे बचा।
3 मेरा गढ़ बन, जिस पर मैं निरन्तर जा सकूँ; तू ने मुझे बचाने की आज्ञा दी है; क्योंकि तू मेरी चट्टान और मेरा गढ़ है।
4 हे मेरे परमेश्वर, मुझे दुष्टों के हाथ से, अन्यायी और क्रूर मनुष्य के हाथ से छुड़ा।
5 क्योंकि हे यहोवा परमेश्वर, तू ही मेरी आशा है; तू ही मेरी जवानी से मेरा भरोसा है।
6 तेरे द्वारा मैं गर्भ से ही पोषित हुआ हूँ; तू ही वह है जिसने मुझे मेरी माँ के गर्भ से निकाला; मैं निरन्तर तेरी स्तुति करता रहूँगा।
7 मैं बहुतों के लिए आश्चर्य के समान हूँ, परन्तु तू ही मेरा दृढ़ शरणस्थान है।
8 मेरा मुँह दिन भर तेरी स्तुति और तेरी महिमा से भरा रहे।
9 बुढ़ापे में मुझे त्याग न दे, और जब मेरा बल घटे तब मुझे न छोड़।
10 क्योंकि मेरे शत्रु मेरे विरुद्ध बातें करते हैं, और मेरे प्राण के रक्षक आपस में सम्मति करते हैं,
11 कि परमेश्वर ने उसको त्याग दिया है; उसका पीछा करके उसे पकड़ ले, क्योंकि उसका कोई छुड़ानेवाला नहीं है।
12 हे परमेश्वर, मुझ से दूर न रह; हे मेरे परमेश्वर, मेरी सहायता करने के लिए फुर्ती कर।
13 जो मेरे प्राण के विरोधी हैं वे लज्जित हों और नाश हो जाएं; जो मेरी हानि चाहते हैं वे निन्दा और अपमान से ढके जाएं।
14 परन्तु मैं निरन्तर आशा रखूंगा, और तेरी स्तुति अधिक अधिक करूंगा।
15 मेरा मुंह दिन भर तेरे धर्म और तेरे उद्धार का वर्णन करेगा, यद्यपि मैं उनकी गिनती नहीं जानता।
16 मैं यहोवा परमेश्वर की शक्ति से चलूंगा; मैं केवल तेरे धर्म की चर्चा करूंगा।
17 हे परमेश्वर, तू ने मुझे बचपन ही से सिखाया है; और अब तक मैं तेरे आश्चर्यकर्मों का वर्णन करता आया हूँ।
18 अब जब मैं बूढ़ा और पके बाल वाला हो गया हूँ, तब भी हे परमेश्वर, तू मुझे न छोड़, जब तक कि मैं इस पीढ़ी के लोगों को तेरा बल और सब आनेवाली पीढ़ियों को तेरा पराक्रम न बता दूँ।
19 हे परमेश्वर, तेरा धर्म बहुत महान है; क्योंकि तू ने बड़े बड़े काम किए हैं। हे परमेश्वर, तेरे तुल्य कौन है?
20 तू जिसने मुझे बहुत सी बुराइयाँ और क्लेश दिखाए हैं, फिर भी मुझे जिलाएगा; तू मुझे पृथ्वी की गहराइयों से ऊपर ले आएगा।
21 तू मेरी महानता को बढ़ाएगा, और मुझे फिर से शान्ति देगा।
22 हे मेरे परमेश्वर, मैं भी वीणा और तेरे सत्य से तेरी स्तुति करूँगा; हे इस्राएल के पवित्र, मैं वीणा बजाकर तेरा भजन गाऊँगा।
23 जब मैं तेरा भजन गाऊँगा तब मेरे होंठ आनन्द से गाएँगे, और मेरा प्राण जिसे तू ने छुड़ाया है, आनन्द से गाएगा।
24 मेरी जीभ दिन भर तेरे धर्म की चर्चा करेगी, क्योंकि जो मेरी हानि चाहते हैं वे लज्जित और लज्जित होंगे।
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